साल 2026 के खरीफ सीजन में Tur का उत्पादन सरकारी लक्ष्य **40 लाख टन** के मुकाबले केवल **20-25 लाख टन** रहने का अनुमान है। सूखे की मार के चलते बुआई क्षेत्र में **2.83%** की बढ़त के बावजूद पैदावार प्रभावित हुई है।
देश में तुअर (Tur) की फसल इस साल उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती दिख रही है। भले ही कुल बुआई का रकबा 47.25 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो कि 2.83% की बढ़ोतरी दर्शाता है, लेकिन महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में सूखे और मिट्टी में नमी की कमी ने फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।\n\n### आयात पर बढ़ती निर्भरता\nभारत की सालाना खपत 40 से 45 लाख टन के बीच है। घरेलू सप्लाई में कमी के कारण देश को अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर निर्भर होना पड़ रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच दालों के आयात में 44% का उछाल देखा गया है और यह 6.25 लाख टन तक पहुंच गया है। सरकार म्यांमार, मोजाम्बिक, तंजानिया और सूडान जैसे देशों से सप्लाई जुटा रही है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में कीमतों की अस्थिरता और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां बनी हुई हैं।\n\n### सेक्टर पर असर और चिंताएं\nदालों की किल्लत का असर एग्रीकल्चर वैल्यू चेन पर पड़ रहा है। फूड प्रोसेसिंग कंपनियां कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण मार्जिन दबाव का सामना कर सकती हैं। वहीं, सूखे की मार केवल तुअर तक सीमित नहीं है, मक्का (Maize) का उत्पादन भी 16.75% तक घटने का अनुमान है। इसका सीधा असर पोल्ट्री और कैटल फीड सेक्टर पर पड़ेगा, जहां मक्का एक मुख्य इनपुट है। निवेशकों को आने वाले समय में रिटेल महंगाई के आंकड़ों और ग्रामीण खर्च के पैटर्न पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए, क्योंकि यह सीधे तौर पर कंज्यूमर डिमांड को प्रभावित कर सकता है।
