सरकार ने टेक्सटाइल मिलों को कच्चा माल सस्ता उपलब्ध कराने के लिए कपास आयात पर **11%** कस्टम ड्यूटी में छूट को दिसंबर **2026** तक बढ़ाने की योजना बनाई है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
कपास की घरेलू मांग और उत्पादन के बीच बढ़ते अंतर को पाटने के लिए सरकार यह बड़ा कदम उठाने जा रही है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, देश का कुल कपास उत्पादन 29 मिलियन गांठों से नीचे रहने का अनुमान है, जबकि राष्ट्रीय मांग 34 मिलियन गांठों से अधिक है। आपूर्ति की इसी कमी के चलते घरेलू कीमतें 9,000 रुपये प्रति 100 किलोग्राम के स्तर पर बनी हुई हैं, जो सरकार द्वारा तय फ्लोर प्राइस 8,717 रुपये से काफी ज्यादा है।
टेक्सटाइल सेक्टर पर असर
इस फैसले का सीधा फायदा भारतीय कपड़ा निर्माताओं को होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच, कच्चा माल सस्ता मिलने से भारतीय एक्सपोर्टर्स को अपनी कीमतों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद मिलेगी। इस चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही में ही आयात में 63% का उछाल देखा गया है, जो कुल 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है।
चुनौतियां अभी बरकरार
हालांकि सरकार ने टैक्स में राहत दी है, लेकिन ग्लोबल मार्केट में कपास की कीमतें 83 सेंट प्रति पाउंड से ऊपर बनी हुई हैं, जो आयात की लागत को बढ़ा रही हैं। साथ ही, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट भी मिलों की जेब पर भारी पड़ रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस नीति की सफलता वैश्विक बाजार की स्थिरता और रुपये की चाल पर काफी हद तक निर्भर करेगी।
