Solvent Extractors’ Association of India (SEA) ने मोजाम्बिक के नंपुला प्रांत के साथ एक एग्रीमेंट किया है। इसका उद्देश्य Nacala कॉरिडोर के जरिए एक सस्टेनेबल ऑयलसीड सप्लाई चेन बनाना है, ताकि भारत का एडिबल ऑयल इंपोर्ट पर भारी खर्च कम हो सके।
एडिबल ऑयल की बढ़ती मांग और इंपोर्ट का संकट
भारत अपनी कुल एडिबल ऑयल खपत का लगभग 57% हिस्सा इंपोर्ट करता है, जिसके कारण घरेलू बाजार में कीमतों में अक्सर अस्थिरता बनी रहती है। अब इस निर्भरता को कम करने के लिए SEA ने मोजाम्बिक के नंपुला प्रांत के साथ हाथ मिलाया है। मुंबई में आयोजित GLOBOIL India 2026 में इस साझेदारी का ऐलान किया गया, जो इंडोनेशिया, मलेशिया और दक्षिण अमेरिका जैसे पारंपरिक सप्लायर्स पर भारत की निर्भरता को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
कैसे काम करेगा नया कॉरिडोर?
इस प्रोजेक्ट में Nacala Development Corridor का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें रोड और रेल के जरिए डीप-वाटर 'Port of Nacala' तक पहुंच आसान हो जाएगी। यह भारत के वेस्ट कोस्ट के लिए एक छोटा और किफायती शिपिंग रूट साबित हो सकता है, बशर्ते लॉजिस्टिक्स का इंफ्रास्ट्रक्चर बड़े स्तर पर तैयार हो सके।
सस्टेनेबिलिटी और रेगुलेटरी मानक
प्रोजेक्ट की देखरेख 'Solidaridad Network' करेगा ताकि खेती के दौरान सस्टेनेबिलिटी स्टैंडर्ड्स का पालन हो। भारत अब इंपोर्टेड कृषि उत्पादों की ट्रेसिबिलिटी (Traceability) को लेकर काफी सख्त हो गया है, इसलिए शुरुआत से ही क्वालिटी पर फोकस किया जा रहा है। अगले 3 साल तक टीम मिट्टी की सेहत और वहां क्रशिंग-रिफाइनिंग यूनिट लगाने की वित्तीय व्यवहार्यता (Financial Viability) की जांच करेगी।
निवेश के जोखिम और चुनौतियां
निवेशकों को ध्यान रखना होगा कि मोजाम्बिक के उत्तरी हिस्सों में सुरक्षा की स्थिति पहले भी बड़ी परियोजनाओं के लिए चिंता का विषय रही है। इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जो इंपोर्ट कॉस्ट को प्रभावित करता है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट फिजिबिलिटी स्टेज पर है, इसलिए निवेशकों को यह देखना होगा कि कौन सी बड़ी कंपनियां इसमें पूंजी लगाने का फैसला लेती हैं।
