Solvent Extractors’ Association of India (SEA) अब कोलंबिया की Fedepalma के साथ हाथ मिला रहा है। इंडोनेशिया के B50 बायोडीजल मैंडेट के कारण पाम ऑयल की ग्लोबल सप्लाई कम हो रही है, जिससे भारत के लिए नए विकल्पों की तलाश जरूरी हो गई है।
भारत अपनी एडिबल ऑयल (Edible Oil) की निर्भरता को कम करने के लिए सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई कर रहा है। इसी दिशा में, Solvent Extractors’ Association of India (SEA) ने कोलंबिया के National Federation of Oil Palm Growers (Fedepalma) के साथ एक एमओयू (MoU) साइन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए एक बड़ी रणनीतिक पहल है।
इंडोनेशिया का B50 बायोडीजल मैंडेट
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण जुलाई 2026 से लागू हुआ इंडोनेशिया का B50 बायोडीजल मैंडेट है। इसके तहत इंडोनेशिया अपने पाम ऑयल के बड़े स्टॉक का इस्तेमाल फ्यूल बनाने में कर रहा है। इससे खाने वाले तेल (edible oil) की ग्लोबल उपलब्धता में भारी कमी आई है, जिससे भारत जैसे आयातक देशों के लिए महंगाई का दबाव बढ़ गया है।
लॉजिस्टिक्स और चुनौतियां
इंडोनेशिया और मलेशिया की तुलना में कोलंबिया से तेल मंगाने का सफर काफी लंबा है। कोलंबिया से भारत तक शिपिंग में लगभग 45 दिन का समय लगता है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस कारण भारतीय इंपोर्टर्स को अब अपनी इन्वेंट्री प्लानिंग को और भी अधिक सटीक बनाना होगा ताकि सप्लाई चेन में कोई रुकावट न आए।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
घरेलू एडिबल ऑयल कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन सीधे तौर पर इन आयात नीतियों पर निर्भर करते हैं। खाद्य महंगाई को कंट्रोल रखने के लिए सरकार लगातार इंपोर्ट ड्यूटी और सप्लाई सिक्योरिटी पर नजर बनाए हुए है। जानकारों का मानना है कि अलग-अलग देशों से सोर्सिंग करने से भारत ग्लोबल उतार-चढ़ाव से खुद को सुरक्षित रख पाएगा। अब बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि भारतीय रिफाइनरीज कितनी तेजी से कोलंबियाई सप्लाई को अपने मौजूदा नेटवर्क में इंटीग्रेट करती हैं।
