India Mining Sector: FY27 में खुलेंगी 60 नई खदानें, सरकार का बड़ा प्लान!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Mining Sector: FY27 में खुलेंगी 60 नई खदानें, सरकार का बड़ा प्लान!

भारत सरकार अगले फाइनेंशियल ईयर (FY27) में 60 नई खदानों को चालू करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य लेकर चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य लिथियम और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की घरेलू आपूर्ति बढ़ाना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। सरकार एक्सप्लोरेशन (Exploration) के लक्ष्यों को भी तेजी से पूरा कर रही है और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए ऑक्शन (Auction) भी जल्द शुरू होंगे।

क्या है सरकार का प्लान?

केंद्रीय खान मंत्रालय (Union Ministry of Mines) ने घोषणा की है कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में 60 नई खदानों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल 36 खदानें सफलतापूर्वक शुरू की गई थीं। यह पहल इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs), क्लीन एनर्जी और एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) की घरेलू सप्लाई को बढ़ाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है। नई खदानों के साथ ही, सरकार अगले तीन महीनों में लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए बिड (Bid) आमंत्रित करने की योजना बना रही है, जिससे इन हाई-डिमांड मैटेरियल्स (High-Demand Materials) के लिए एक पूरी डोमेस्टिक वैल्यू चेन (Domestic Value Chain) तैयार हो सके।

एक्सप्लोरेशन और प्रोसेसिंग में तेजी

नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (National Critical Mineral Mission) के तहत, सरकार एक्सप्लोरेशन के प्रयासों को भी तेज कर रही है। 2031 तक टोटल एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य बढ़ाकर 2,000 कर दिया गया है, जो पहले के 1,200 के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है। अब तक, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) 571 प्रोजेक्ट्स पूरे कर चुका है, और इस साल 300 और प्रोजेक्ट्स पूरे होने की उम्मीद है। प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी भी बढ़ रही है, 56 क्रिटिकल मिनरल ब्लॉक्स (Critical Mineral Blocks) की सफलतापूर्वक नीलामी हो चुकी है, और सरकार का लक्ष्य 2031 तक इसे 200 से अधिक करना है। इस विस्तार का उद्देश्य भारत को रेयर अर्थ एलिमेंट्स (Rare Earth Elements), जिरकोनियम और टाइटेनियम जैसे मैटेरियल्स में आत्मनिर्भर बनाना है।

निवेशकों के लिए क्यों है अहम?

मेटल्स और माइनिंग सेक्टर (Metals and Mining Sector) में निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव का संकेत है। अब फोकस पारंपरिक कमोडिटीज (Traditional Commodities) जैसे कोयला या आयरन ओर (Iron Ore) से हटकर वैल्यू-एडेड क्रिटिकल मिनरल्स (Value-added Critical Minerals) की ओर बढ़ रहा है। लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग यूनिट्स पर सरकार का ध्यान खास तौर पर महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, भारत इन मैटेरियल्स के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, जो EV बैटरी सप्लाई चेन के लिए महत्वपूर्ण हैं। जो कंपनियां इन मिनरल ब्लॉक्स को हासिल कर सकती हैं या प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए टेंडर जीत सकती हैं, उन्हें डोमेस्टिक EV और रिन्यूएबल एनर्जी मार्केट (Renewable Energy Market) के विकास के साथ लॉन्ग-टर्म ग्रोथ (Long-term Growth) के अवसर मिल सकते हैं।

एग्जीक्यूशन और ऑपरेशनल जोखिम

हालांकि, विस्तार की योजनाएं महत्वपूर्ण हैं, निवेशकों को माइनिंग सेक्टर के अंतर्निहित जोखिमों (Inherent Risks) से भी अवगत रहना चाहिए। बड़े पैमाने पर माइनिंग प्रोजेक्ट्स कैपिटल-इंटेंसिव (Capital-intensive) होते हैं और इनमें लंबा समय लगता है। सफलता समय पर एनवायरनमेंटल और फॉरेस्ट क्लीयरेंस (Environmental and Forest Clearances) मिलने के साथ-साथ स्मूथ लैंड एक्वीजीशन (Land Acquisition) पर भी निर्भर करती है, जिसमें ऐतिहासिक रूप से भारत में देरी होती रही है। इसके अलावा, माइनिंग ऑपरेशंस ग्लोबल कमोडिटी प्राइस वोलैटिलिटी (Global Commodity Price Volatility) के अधीन होते हैं, जो इन नए वेंचर्स (Ventures) की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को प्रभावित कर सकते हैं। इन प्रोजेक्ट्स में भाग लेने वाली कंपनियों को हाई अपफ्रंट डेवलपमेंट कॉस्ट (High Upfront Development Costs) को मैनेज करते हुए कॉम्प्लेक्स रेगुलेटरी फ्रेमवर्क (Complex Regulatory Frameworks) को नेविगेट (Navigate) करना होगा।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

आने वाले क्वार्टर्स (Quarters) में ट्रैक करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक लिथियम और निकेल प्रोसेसिंग यूनिट्स के आगामी ऑक्शन का विवरण है। निवेशकों को यह देखना चाहिए कि कौन सी कंपनियां इन बिड्स में भाग ले रही हैं और वे प्रोजेक्ट्स को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने में कितनी सक्षम हैं। एक्सप्लोरेशन टारगेट्स (Exploration Targets) पर सरकार की प्रगति और 60 नई खदानों के वास्तविक कमीशनिंग डेट (Commissioning Date) की निरंतर निगरानी भी यह समझने में मदद करेगी कि ये नीतियां कितनी प्रभावी ढंग से उत्पादन में तब्दील हो रही हैं।

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