भारत सरकार का लक्ष्य है कि साल 2047 तक देश अपनी सोने की कुल मांग का **20%** हिस्सा घरेलू स्तर पर ही पूरा करे। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश में खनन (Mining) का विस्तार किया जाएगा और घरों में रखे सोने को भी फाइनेंसियल सिस्टम में लाया जाएगा, जिससे सोने के इंपोर्ट (Import) पर निर्भरता कम हो सके।
सोने का उत्पादन बढ़ाएगा भारत
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 'स्वर्णिम उड़ान 2047' नाम की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में भारत सालाना केवल 1.6 टन सोना ही पैदा कर पाता है, जबकि सोने की कुल मांग 800 से 850 टन के बीच रहती है। इस बड़े अंतर को पाटने के लिए, सरकार ने खनन के लिए नई जगहें खोलनी शुरू कर दी हैं। पिछले एक दशक में 8 राज्यों में सोने के खनन के लिए 24 लाइसेंस दिए गए हैं, जिनसे करीब 270 टन सोना मिलने का अनुमान है।
जोंनागिरी प्रोजेक्ट: एक नई शुरुआत
इस सेक्टर के लिए एक बड़ा कदम आंध्र प्रदेश में जोंनागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट (Jonnagiri Gold Project) का शुरू होना है, जिसने साल 2026 से उत्पादन शुरू कर दिया है। यह आजादी के बाद भारत की पहली बड़ी प्राइवेट गोल्ड माइन है। जिओमायसोर सर्विसेज (Geomysore Services) द्वारा मैनेज किए जा रहे इस प्रोजेक्ट में डेक्कन गोल्ड माइन्स (Deccan Gold Mines) और थ्रिवेणी अर्थमूवर्स (Thriveni Earthmovers) का सहयोग है। इसमें ₹400 करोड़ से ज्यादा का निवेश हुआ है। उम्मीद है कि यह माइन सालाना लगभग 1 टन सोना पैदा करेगी, जो मौजूदा राष्ट्रीय उत्पादन को दोगुना कर देगा। निवेशकों के लिए यह प्रोजेक्ट एक अहम संकेत होगा कि क्या बड़े पैमाने पर प्राइवेट निवेश घरेलू इंडस्ट्री के लिए एक भरोसेमंद मॉडल बन सकता है।
घरों में रखे सोने का होगा 'फाइनेंशियल' इस्तेमाल
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय घरों में अनुमानित 31,000 टन सोना पड़ा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का मानना है कि टोकेनाइजेशन (Tokenization) और डिजिटल ओनरशिप (Digital Ownership) जैसे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इस छिपी हुई दौलत को सीधे फाइनेंसियल सिस्टम में लाया जा सकता है। अगर यह सफल होता है, तो इससे मार्केट लिक्विडिटी (Market Liquidity) बढ़ेगी और इंपोर्ट पर भारी निर्भरता के कारण देश के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।
आगे की राह: पॉलिसी और रेगुलेशन
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने पॉलिसी को एक जगह लाने के लिए 'नेशनल गोल्ड बोर्ड' (National Gold Board) बनाने का भी सुझाव दिया है, जो चाय बोर्ड ऑफ इंडिया (Tea Board of India) की तरह काम करेगा। यह बोर्ड रेगुलेशन को आसान बनाने और खनन व मैन्युफैक्चरिंग में और निवेश को बढ़ावा देने का काम करेगा। हालांकि, इन लक्ष्यों का असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (Exploration Licenses) कितनी जल्दी एक्टिव और प्रॉफिटेबल माइंस में बदलते हैं और क्या सरकार घरों के सोने को फाइनेंसियल असेट्स में बदलने के लिए सफल इंसेटिव दे पाती है। निवेशकों को प्रस्तावित नेशनल गोल्ड बोर्ड और नई माइनिंग साइट्स की नीलामी की गति पर नज़र रखनी चाहिए।
