भारत में सनफ्लावर ऑयल का इंपोर्ट सितंबर में **36%** घटकर **1,03,000 मीट्रिक टन** रह गया है, जो पिछले **4 सालों** का सबसे निचला स्तर है। ब्लैक सी (Black Sea) क्षेत्र में जारी लॉजिस्टिक्स बाधाओं के कारण रिफाइनर्स अब पाम ऑयल की ओर रुख कर रहे हैं।
ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के कारण शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते सप्लाई चेन में बड़ी बाधा आई है। सितंबर 2026 में आया यह 36% का उछाल अप्रैल 2022 के बाद सबसे कम है। त्योहारी सीजन के दौरान मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनर्स ने अब पाम ऑयल की ओर शिफ्टिंग शुरू कर दी है।
पाम ऑयल बना सहारा
आंकड़ों पर गौर करें तो पाम ऑयल का इंपोर्ट सितंबर में 8,10,000 मीट्रिक टन के 7 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले 3.5% अधिक है। वहीं, सोयाबीन तेल (Soyoil) के शिपमेंट में 4.6% की गिरावट आई है और यह 6,00,000 मीट्रिक टन रहा। रिफाइनर्स अपनी इन्वेंट्री को बनाए रखने के लिए लगातार अपनी सोर्सिंग स्ट्रैटेजी बदल रहे हैं।
सरकारी दखल और चुनौतियां
फूड इन्फ्लेशन पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने 24 सितंबर 2026 से प्रभावी एक बड़ा कदम उठाया है। क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, जबकि क्रूड पाम और सोयाबीन ऑयल पर ड्यूटी आधी कर दी गई है। हालांकि, भारत अपनी जरूरत का दो-तिहाई वेजिटेबल ऑयल इंपोर्ट करता है, जिससे घरेलू कंपनियां ग्लोबल मार्केट में होने वाली हलचल के प्रति काफी संवेदनशील बनी हुई हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनियां अपनी मार्जिन को कैसे सुरक्षित रखती हैं।
