ब्लैक सी (Black Sea) में जारी तनाव के चलते भारत में सनफ्लावर ऑयल का आयात गिरकर **103,000 मीट्रिक टन** पर आ गया है, जो अप्रैल **2022** के बाद सबसे कम है। त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए अब इम्पोर्टर्स का रुख पाम ऑयल की तरफ बढ़ा है, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बन सकता है।
सप्लाई चेन पर गहरा असर
ब्लैक सी रीजन में जारी संघर्ष ने सप्लाई चेन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। प्रमुख पोर्ट हब पर इंफ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान के कारण हजारों टन कार्गो या तो फंस गया है या फिर कैंसिल हो गया है। अब सप्लायर्स को सामान भेजने के लिए बाल्टिक सी पोर्ट्स का सहारा लेना पड़ रहा है। इस बदलाव के कारण फ्रेट चार्ज बढ़ गए हैं और डिलीवरी में 10 दिनों तक की देरी हो रही है। इस अतिरिक्त लागत का बोझ भारतीय आयातकों पर पड़ रहा है, जिससे त्योहारी सीजन के दौरान कंपनियों के मार्जिन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
पाम ऑयल की ओर बढ़ा रुझान
सनफ्लावर ऑयल की कमी को पूरा करने के लिए घरेलू बाजार में पाम ऑयल की मांग में जोरदार उछाल आया है। सितंबर 2026 में क्रूड पाम ऑयल का आयात 810,000 टन के सात महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे बड़े उत्पादक देशों में अचानक बढ़ी इस डिमांड से ग्लोबल इन्वेंट्री पर दबाव बन सकता है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
सरकार का बड़ा कदम और निवेशकों के लिए संकेत
बढ़ती महंगाई को काबू में रखने के लिए भारत सरकार ने 24 सितंबर, 2026 को क्रूड सनफ्लावर ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को घटाकर 0% कर दिया है। यह कदम रिटेल कीमतों को स्थिर करने के लिए उठाया गया है। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रमुख एडिबल ऑयल कंपनियां इन बढ़ते इनपुट कॉस्ट को कैसे मैनेज करती हैं और क्या वे इस सप्लाई ट्रांजिशन के बीच अपने मुनाफे को बचा पाती हैं या नहीं।
