Sugar Prices: सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं घट रहे चीनी के दाम, क्या शेयर बाजार में बढ़ेगी टेंशन?

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sugar Prices: सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी नहीं घट रहे चीनी के दाम, क्या शेयर बाजार में बढ़ेगी टेंशन?

बाजार में चीनी के दाम लगातार **₹64** प्रति किलो के आसपास बने हुए हैं। सरकार ने सप्लाई बढ़ाने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी खत्म करने और स्टॉक लिमिट जैसे सख्त कदम उठाए हैं, लेकिन अभी तक रिटेल मार्केट में इसका असर नहीं दिख रहा है।

भारतीय बाजारों में चीनी की कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं। भले ही मिलों के स्तर पर एक्स-मिल कीमतें ₹67 के ऊपरी स्तर से घटकर ₹55 प्रति किलो पर आ गई हों, लेकिन आम ग्राहकों को अभी भी यह ₹64 प्रति किलो के भाव पर ही मिल रही है। यह अंतर साफ बताता है कि सप्लाई चेन में सुधार की जरूरत है।

सरकार के सख्त रेगुलेटरी कदम

सप्लाई की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने 1 सितंबर से 30 नवंबर तक बल्क कंज्यूमर्स पर स्टॉकहोल्डिंग लिमिट लगा दी है, ताकि जमाखोरी को रोका जा सके। इसके अलावा, 10 लाख टन कच्ची चीनी के इंपोर्ट को ड्यूटी फ्री करने की अनुमति दी गई है, बशर्ते इसे 2 महीने के भीतर प्रोसेस करके बाजार में उतारना होगा।

प्रोडक्शन का संकट

चीनी के ऊंचे दामों के पीछे सबसे बड़ी वजह घरेलू प्रोडक्शन में आई गिरावट है। 2025-26 सीजन के लिए अनुमानित प्रोडक्शन अब 306 लाख टन रहने की उम्मीद है, जो पहले के अनुमानों से काफी कम है। रेड रॉट (Red Rot) और टॉप बोरर (Top Borer) जैसी फसलों की बीमारियों और बेमौसम बारिश ने किसानों और मिलों की कमर तोड़ दी है।

निवेशकों के लिए संकेत

इन्वेस्टर नजरिए से यह सेक्टर अभी काफी दबाव में है। सरकार की प्राथमिकता फूड इन्फ्लेशन को काबू में रखना है, जिसके कारण मिलों पर सेल्स कोटा और प्राइस कैप का दबाव बना रहता है। इससे कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि त्यौहारों के सीजन में सरकार अपनी नीतियों में क्या बदलाव करती है और चीनी मिलें इस चुनौतीपूर्ण माहौल में अपनी इन्वेंट्री कैसे मैनेज करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.