त्योहारी सीजन में चीनी के भाव **₹55 से ₹65** प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने **1 मिलियन टन** रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की अनुमति दे दी है और स्टॉक लिमिट भी तय कर दी है।
उत्पादन में भारी गिरावट का असर
देश में चीनी की कीमतों में आई यह उछाल सप्लाई और डिमांड के बीच बढ़ते अंतर के कारण है। 2025-26 सीजन के लिए जो शुरुआती अनुमान 34.3 मिलियन टन का था, उसे घटाकर 30.6 मिलियन टन कर दिया गया है। खराब मानसून और फसलों में कीटों के हमले के चलते उत्पादन में 11% की कमी आई है, जिसने मार्केट में सप्लाई टाइट कर दी है।
सरकार का कड़ा रुख
त्योहारी डिमांड के बीच कीमतों को कंट्रोल में रखने के लिए सरकार ने कई कड़े फैसले लिए हैं:
- इम्पोर्ट में छूट: 31 अक्टूबर, 2026 तक 1 मिलियन टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की मंजूरी दी गई है।
- स्टॉक लिमिट: व्यापारियों के लिए 400 टन की लिमिट 30 नवंबर, 2026 तक लागू कर दी गई है। वहीं, थोक ग्राहकों के लिए स्टॉक की सीमा 15 दिन की खपत तक सीमित कर दी गई है।
- एक्सपोर्ट बैन: घरेलू सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए चीनी के एक्सपोर्ट पर रोक 30 सितंबर, 2026 तक जारी रहेगी।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
शुगर कंपनियों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। जहां ऊंचे दाम से मार्जिन सुधरने की उम्मीद होती है, वहीं सरकारी स्टॉक लिमिट और एक्सपोर्ट पर पाबंदी कंपनियों की कमाई की क्षमता को सीमित कर रही है। इसके अलावा, ₹365 प्रति क्विंटल की FRP (Fair and Remunerative Price) और इथेनॉल ब्लेंडिंग से जुड़ी सरकारी नीतियों पर निवेशकों की नजर बनी रहनी चाहिए। अब तिमाही नतीजों और बारिश के आंकड़ों पर सेक्टर की दिशा निर्भर करेगी।
