सरकार ने **10 लाख टन** कच्चे शुगर के इंपोर्ट को मंजूरी दी है, जिसके बाद रिटेल मार्केट में शुगर के भाव **₹62.57** प्रति किलो तक आ गए हैं। निवेशकों के लिए यह राहत की बात जरूर है, लेकिन सप्लाई की कमी और सख्त सरकारी नियमों के बीच शुगर कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है।
भारत में शुगर की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। पिछले एक हफ्ते में रिटेल शुगर के दाम 3.85% गिरकर ₹62.57 प्रति किलो (3 सितंबर 2026 तक) पर आ गए हैं। त्योहारों के सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद के बीच सरकार का यह कदम कीमतों को नियंत्रित रखने के मकसद से उठाया गया है।\n\n### सरकार का 'इंपोर्ट' वाला दांव\n\nसरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री कच्ची शुगर के इंपोर्ट को अनुमति दी है। साथ ही, डीलर्स के लिए स्टॉक-होल्डिंग लिमिट को 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दिया गया है, जो मध्य-सितंबर से नवंबर तक लागू रहेगा। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में मिलों को अपनी सेलिंग प्राइस ₹5,000 प्रति क्विंटल तक सीमित रखने के आदेश दिए गए हैं, ताकि जमाखोरी को रोका जा सके।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम (Investors Risk)\n\nसरकारी सख्ती और प्राइस कैप का सीधा असर शुगर मिलों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है। अगर मिलें ऊंची लागत के बावजूद तय दाम पर शुगर बेचने को मजबूर होती हैं, तो आने वाली तिमाहियों में कंपनियों का फाइनेंशियल परफॉरमेंस दबाव में दिख सकता है।\n\n### प्रोडक्शन में भारी गिरावट\n\nहालिया राहत के बावजूद, शुगर के दाम एक महीने पहले की तुलना में करीब 27% ऊपर बने हुए हैं। चिंता की बात यह है कि 2025-26 के लिए प्रोडक्शन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। खराब मौसम और 'रेड रॉट' (Red Rot) व 'टॉप बोरर' (Top Borer) जैसी बीमारियों के कारण पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। निवेशकों को अब यह ट्रैक करना होगा कि क्या इम्पोर्ट की गई शुगर मार्केट में सप्लाई गैप को भरने में कामयाब होती है या नहीं।
