मानसून के बाद कंस्ट्रक्शन एक्टिविटी बढ़ने से भारत में स्टील की कीमतों में तेजी लौटी है। सप्लाई में कमी और बढ़ती मांग के बीच रिबार की कीमतों ने रफ्तार पकड़ी है।
स्टील की कीमतों में सुधार
सितंबर की शुरुआत से ही स्टील की कीमतों में एक सकारात्मक रुख देखने को मिल रहा है। अगस्त के महीने में कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाले Rebar के दाम में 8.6% की मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे इसकी औसत कीमत ₹53,294 प्रति टन तक पहुंच गई है। यह रुझान बताता है कि बाजार में इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण कार्यों की मांग जोर पकड़ रही है।
रिबार बनाम HRC
वहीं दूसरी ओर, ऑटोमोबाइल और अप्लायंस सेक्टर में उपयोग होने वाले Hot Rolled Coil (HRC) की कीमतों में 1.2% की मामूली बढ़त देखी गई, और यह ₹58,575 प्रति टन पर पहुंच गए हैं। यह अंतर साफ करता है कि बाजार की मजबूती अभी इंडस्ट्रियल खपत की तुलना में कंस्ट्रक्शन-आधारित मांग पर ज्यादा टिकी है।
सप्लाई का गणित
कीमतों को सहारा देने में सप्लाई साइड का भी बड़ा हाथ है। अगस्त में बड़े स्टील निर्माताओं ने 'मेंटेनेंस शटडाउन' लिया था, जिससे उत्पादन में अस्थायी कमी आई और सप्लाई टाइट हो गई। जुलाई में फिनिश्ड स्टील की खपत में 6.5% की सालाना बढ़ोतरी हुई, जबकि उत्पादन केवल 1.4% बढ़ा। मांग और उत्पादन के बीच का यह फासला कीमतों को सपोर्ट दे रहा है।
निवेशकों के लिए अहम फैक्टर: ट्रेड बैलेंस
हालांकि मांग मजबूत है, लेकिन निवेशकों को भारत के इंपोर्ट-एक्सपोर्ट डेटा पर नजर रखनी चाहिए। जुलाई में स्टील का निर्यात 44.1% बढ़ा, लेकिन आयात में भी 9.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। भारत अभी भी नेट इंपोर्टर बना हुआ है, जो घरेलू कंपनियों के लिए प्राइसिंग पावर को सीमित कर सकता है।
मेटल सेक्टर का ओवरऑल ट्रेंड
स्टील के अलावा, अन्य नॉन-फेरस मेटल्स जैसे Aluminium, Copper और Zinc की कीमतों में भी अगस्त के दौरान तेजी रही है। अब निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि मानसून के बाद कंस्ट्रक्शन की गति क्या रहती है और कच्चे माल की लागत कितनी स्थिर बनी रहती है।
