भारत ने घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए **2025/26** में रिकॉर्ड **1.1 मिलियन टन** सोयाबीन का आयात किया है। इस अचानक उछाल ने न केवल सोयाबीन मील के एक्सपोर्ट को **50%** तक घटा दिया है, बल्कि कस्टम्स विभाग ने टैक्स चोरी की जांच भी शुरू कर दी है।
आयात में बेतहाशा बढ़ोतरी
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, 2025/26 मार्केटिंग ईयर के दौरान सोयाबीन का आयात 1.1 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के महज 2,000 टन के मुकाबले एक बड़ा उछाल है। घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई और कमी के कारण कंपनियों को अपनी प्रोडक्शन लाइनों को चालू रखने के लिए विदेश से माल मंगाना पड़ा है।
सप्लाई चेन की चुनौतियां और प्रीमियम कीमत
भारतीय नियमों के तहत केवल नॉन-जीएम (Non-GM) सोयाबीन का ही आयात किया जा सकता है, जिसके कारण भारत मुख्य रूप से बेनिन, नाइजर, टोगो और नाइजीरिया जैसे देशों पर निर्भर है। इन विशिष्ट किस्मों की सीमित सप्लाई के कारण भारतीय आयातकों को ग्लोबल मार्केट की तुलना में काफी ज्यादा प्रीमियम कीमत चुकानी पड़ रही है। इसमें नाइजर सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, जिसने सितंबर 2026 तक करीब 430,000 टन की सप्लाई की है।
कस्टम्स की जांच का डर
आयात में इस अचानक तेजी ने भारतीय कस्टम्स अधिकारियों का ध्यान खींचा है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि कहीं टैक्स चोरी के लिए नाइजीरियाई सोयाबीन को नाइजर का बताकर तो नहीं लाया गया। यह रेगुलेटरी रिस्क निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि जांच सख्त होने पर सप्लाई चेन में देरी और कंप्लायंस कॉस्ट में बढ़ोतरी हो सकती है।
एक्सपोर्ट और अन्य सेक्टरों पर असर
घरेलू सप्लाई पर दबाव का असर एक्सपोर्ट पर साफ दिख रहा है, जहां सोयाबीन मील का निर्यात 50% गिरकर 1 मिलियन टन रह गया है। इसका सीधा असर पोल्ट्री और लाइवस्टॉक फीड बनाने वाली कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा, क्योंकि सोयाबीन मील फीड का एक प्रमुख हिस्सा है। इसके अलावा, एडिबल ऑयल रिफाइनर्स के लिए भी कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अब बाजार की नजरें कस्टम्स की जांच के नतीजों और घरेलू फसल के आंकड़ों पर टिकी हैं।
