भू-राजनीति से मिली रफ्तार, पर फेड की चिंताएं हावी
भारतीय सर्राफा बाज़ारों में आज चांदी (Silver) की कीमतों में अच्छी रिकवरी देखी गई। 1 किलोग्राम चांदी ₹249,360 और 10 ग्राम चांदी ₹2,494 पर कारोबार करती दिखी, जो कल की भारी 4% की गिरावट से काफी बेहतर है। 1 ग्राम चांदी का भाव ₹249 पर पहुँचकर 1.53% चढ़ा।
यह उछाल अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता में प्रगति जैसे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों से प्रेरित है। आम तौर पर, भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर कीमती धातुओं की 'सेफ-हेवन' डिमांड बढ़ती है, लेकिन तनाव कम होने से बाज़ार को कुछ राहत मिली है।
हालांकि, इस रिकवरी के बावजूद, हालिया संघर्षों की शुरुआत के बाद से चांदी की कीमतें लगभग 17% तक गिर चुकी हैं, जो दिखाता है कि रिकवरी अभी भी मज़बूत नहीं है और बाज़ार की स्थितियां अनिश्चित बनी हुई हैं।
फेड की 'हॉकिश' सोच और डॉलर का दबदबा
दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की नीतियां चांदी की कीमतों पर दबाव बना रही हैं। फेड के नए नॉमिनी केविन वॉर्श (Kevin Warsh) के 'हॉकिश' (hawkish) रुख, जो इंफ्लेशन (inflation) को लेकर सख़्त संकेत दे रहे हैं, चांदी की कीमतों को पूरी तरह से ऊपर जाने से रोक रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, चांदी की कीमतें अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के विपरीत दिशा में चलती हैं; डॉलर के मज़बूत होने पर चांदी की कीमतें अक्सर गिरती हैं।
अप्रैल 2026 में सोना-चांदी का अनुपात (gold-to-silver ratio) लगभग 59-61:1 के आसपास रहा, जो दर्शाता है कि चांदी सोने की तुलना में बहुत सस्ती नहीं रह गई है। पिछले साल की तुलना में, इसने सोने को काफी पीछे छोड़ दिया है, क्योंकि अप्रैल 2025 में यह अनुपात 105:1 तक था।
चांदी का अस्थिर इतिहास और भविष्य का अनुमान
चांदी का 'टर्बो-गोल्ड' के रूप में जाना जाना गलत नहीं है। 2026 की शुरुआत में चांदी अपने ऑल-टाइम हाई (nominal all-time high) लगभग $121.64 तक पहुंची थी, लेकिन अप्रैल 2026 तक यह घटकर लगभग $79-$80 पर आ गई थी। यह अस्थिरता चांदी की खासियत है।
दुनिया भर के विश्लेषक (Analysts) इस रिकवरी को अभी भी 'नाजुक' (fragile) बता रहे हैं। लगातार छठे साल सप्लाई डेफिसिट (supply deficit) यानी मांग से कम सप्लाई का अनुमान कीमतों के लिए एक मज़बूत आधार प्रदान करता है।
लेकिन, इंडस्ट्रियल डिमांड (industrial demand), खासकर सोलर एनर्जी (solar energy) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से, दबाव में है। इसमें सब्स्टीट्यूशन (substitution) और एफिशिएंसी गेन्स (efficiency gains) के कारण लंबी अवधि में मांग पर असर पड़ने की आशंका है।
2026 के लिए चांदी के औसत प्राइस का अनुमान $79-$81 के बीच लगाया जा रहा है, लेकिन इसमें $44 से लेकर $165 तक का बड़ा दायरा (range) देखने को मिल सकता है, जो इसकी कीमतों की अत्यधिक अस्थिरता को दर्शाता है।
निवेशक आगे की दिशा तय करने के लिए इंफ्लेशन डेटा, फेड के बयानों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर नज़र रखे हुए हैं।
