ग्लोबल बाज़ार में उछाल, भारत में गिरावट
जहां अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में Comex Silver की कीमतें 1% से ज़्यादा उछलकर $87 के पार पहुंच गईं और दो महीने का उच्चतम स्तर छुआ, वहीं भारतीय बाज़ार में चांदी की चाल धीमी पड़ गई। इस ग्लोबल तेज़ी की मुख्य वजह चांदी की औद्योगिक मांग में आई तेज़ी है। चांदी की उच्च इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (Electrical Conductivity) के कारण यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर पैनल जैसे उद्योगों के लिए बेहद अहम है।
घरेलू बाज़ार पर दबाव की वजहें
इसके विपरीत, भारतीय बाज़ार में कीमतों पर दबाव देखा गया। इसके पीछे कई अहम कारण रहे। सबसे पहले, अमेरिका में Producer Inflation (उत्पादक मुद्रास्फीति) में आई तेज़ी से यह आशंका बढ़ी है कि फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है। इसके अलावा, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) में बढ़ोतरी ने भी प्रीशियस मेटल्स (Precious Metals) के प्रति निवेशकों के सेंटिमेंट (Sentiment) को प्रभावित किया है, क्योंकि आमतौर पर जब यील्ड्स बढ़ती हैं तो ऐसे निवेश पर असर पड़ता है।
भू-राजनीतिक तनावों का असर
बाजार में अनिश्चितता के माहौल को और बढ़ाते हुए, भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Risks) भी काफी बढ़े हुए हैं। निवेशक अमेरिका-ईरान शांति की संभावनाओं पर होने वाली अमेरिका-चीन शिखर वार्ता (US-China Summit) पर नज़रें गड़ाए हुए हैं, जो स्थिति को और जटिल बना सकती है।
यह कीमतें भारत द्वारा सोने और चांदी पर आयात शुल्क (Import Tariff) को 6% से बढ़ाकर 15% करने के बाद भी आई हैं। आमतौर पर, ऐसे शुल्क बढ़ाने से आयात कम होता है, लेकिन फिलहाल ग्लोबल कीमतें और औद्योगिक मांग ही मुख्य कारक बने हुए हैं।
चांदी के निवेशकों के लिए भविष्य का नज़रिया मिला-जुला है। जहां औद्योगिक मांग एक सपोर्ट दे रही है, वहीं महंगाई और ब्याज दरों को लेकर मैक्रो इकोनॉमिक (Macroeconomic) दबाव के साथ-साथ भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बड़ी चुनौतियां पेश कर रही हैं।
