त्योहारी सीजन में महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने सितंबर महीने के लिए चीनी बिक्री का अब तक का सबसे बड़ा कोटा यानी **26.5 लाख टन** निर्धारित किया है। सप्लाई में सुधार के लिए अब मंथली के बजाय फोर्टनाइटली (पाक्षिक) आधार पर कोटा जारी होगा।
त्योहारी सीजन के दौरान चीनी की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सरकार ने एक बड़ा बदलाव किया है। सितंबर 2026 के लिए कुल 26.5 लाख टन का चीनी बिक्री कोटा तय किया गया है। बड़ी बात यह है कि सरकार ने पुराने मंथली सिस्टम को खत्म कर अब फोर्टनाइटली (15 दिन) आवंटन प्रणाली लागू कर दी है, ताकि बाजार में सप्लाई की कमी न हो।\n\n### नए नियमों का गणित\n\nमहीने के दूसरे पखवाड़े (16 से 30 सितंबर) के लिए 13.5 लाख टन का कोटा आवंटित किया गया है। फिलहाल रिटेल मार्केट में चीनी की कीमत ₹59 प्रति किलो के आसपास बनी हुई है। इसके अलावा, डीलरों के लिए स्टॉक-होल्डिंग लिमिट को घटाकर 2,000 क्विंटल कर दिया गया है, जो 15 सितंबर 2026 से प्रभावी है।\n\n### शुगर मिलों की बढ़ी मुश्किलें\n\nनए रेगुलेशन के तहत मिलों को कड़ी शर्तों का पालन करना होगा। फोर्टनाइटली सिस्टम में मिलों को पहले हफ्ते में कम से कम 40% कोटा बेचना अनिवार्य है, जबकि बाकी 60% दूसरे हफ्ते में बेचना होगा। इसके साथ ही, इनवॉइस जारी होने के 7 दिनों के भीतर चीनी को डिस्पैच करना भी जरूरी कर दिया गया है।\n\nमंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अगर कोटा समय पर नहीं बिका, तो उसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इससे मिलों के लॉजिस्टिक्स और कैश फ्लो मैनेजमेंट पर दबाव बढ़ना तय है।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम (Investor Risks)\n\nसरकार के इन सख्त फैसलों से शुगर कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ सकता है। यदि मार्केट में सप्लाई बहुत ज्यादा हो जाती है, तो रियलाइजेशन प्राइस पर दबाव बनेगा, जिससे कंपनियों का मुनाफा सीमित हो सकता है। इसके अलावा, 10 लाख टन रॉ शुगर का ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट भी घरेलू कीमतों को दबाने का काम कर रहा है। इन्वेस्टर्स को अब आने वाली तिमाहियों में कंपनियों की इन्वेंट्री टर्नओवर और मार्जिन ट्रेंड पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
