IFSCA ने 'गुड डिलीवरी गाइडलाइंस 2026' पेश की हैं, जिससे भारतीय गोल्ड रिफाइनरीज ग्लोबल स्टैंडर्ड्स से जुड़ सकेंगी। IIBX के जरिए भारत अब केवल गोल्ड का कंज्यूमर ही नहीं, बल्कि एक बड़ा एक्सपोर्टर बनने की राह पर है।
भारत सरकार ने गोल्ड सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। International Financial Services Centres Authority (IFSCA) ने 'गुड डिलीवरी गाइडलाइंस 2026' लॉन्च की हैं, जिसका मकसद भारतीय गोल्ड रिफाइनरीज को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक स्तर के मानकों के बराबर लाना है। फिलहाल भारत की रिफाइनिंग क्षमता 1,200 टन सालाना है, जबकि घरेलू खपत केवल 800-850 टन है। इस अधिशेष क्षमता का सही इस्तेमाल करने के लिए यह फैसला लिया गया है।\n\n### नए नियमों की बारीकियां\n\nनई गाइडलाइंस के तहत रिफाइनरीज को पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कड़े प्रोटोकॉल फॉलो करने होंगे। इसमें गोल्ड के असली मालिकों की पहचान करना, कम से कम 8 साल तक ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड रखना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि सोना संघर्ष वाले इलाकों से न आया हो। यह कदम India International Bullion Exchange (IIBX) के जरिए गोल्ड एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगा।\n\n### चुनौतियां और भविष्य की राह\n\nयह बदलाव जितना बड़ा है, रिफाइनरीज के लिए चुनौतियां भी उतनी ही कड़ी हैं। कई स्थानीय रिफाइनरीज के पास अभी इन ग्लोबल ऑडिट मानकों को पूरा करने वाला इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। ऐसे में compliance और ऑडिटिंग का बढ़ता खर्च मुनाफे पर दबाव डाल सकता है। साथ ही, London Bullion Market Association (LBMA) जैसे स्थापित मानकों के स्तर तक पहुंचना एक क्रमिक प्रक्रिया होगी।\n\nइस बड़े कदम के पीछे फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की हालिया पॉजिटिव रिपोर्ट का भी बड़ा हाथ माना जा रहा है। अब नजरें इस पर होंगी कि रिफाइनरीज कितनी जल्दी इन नियमों को अपनाती हैं और आने वाली तिमाहियों में गोल्ड एक्सपोर्ट के आंकड़ों में कितनी बढ़त देखने को मिलती है।
