त्योहारी सीजन में महंगाई को काबू में रखने के लिए सरकार ने सितंबर 2026 के पहले पखवाड़े के लिए 13 लाख टन चीनी बिक्री का कोटा तय कर दिया है। यह कदम जमाखोरी रोकने के लिए उठाया गया है।
त्योहारी सीजन की मांग और कीमतों में उछाल को देखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सितंबर 2026 के पहले 15 दिनों के लिए 13 लाख मीट्रिक टन चीनी बेचने की सीमा तय की गई है। सरकार अब मंथली के बजाय फोर्टनाइटली (पाक्षिक) आधार पर सप्लाई की निगरानी कर रही है, ताकि मार्केट में चीनी की कोई कमी न हो और कीमतों में हेरफेर न हो सके।
नई गाइडलाइंस और शर्तें
नए नियमों के तहत, शुगर मिलों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने आवंटित कोटे का कम से कम 40% हिस्सा पहले 7 दिनों के भीतर बाजार में उतारें। इस फैसले का मकसद सप्लाई चेन को सुचारू रखना है ताकि मिलें स्टॉक जमा करके न बैठें। इस 13 लाख टन के कोटे में घरेलू चीनी के साथ-साथ पोर्ट-बेस्ड रिफाइनरियों से आने वाली चीनी भी शामिल है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
यह बदलाव शुगर सेक्टर पर सरकारी पकड़ और मजबूत होने का संकेत है। हर दो हफ्ते में कोटा तय होने से कंपनियों के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और सेल्स स्पीड पर असर पड़ेगा। मिलों को अब सरकारी डेडलाइन के हिसाब से डिस्पैच प्लान तैयार करना होगा, जिससे उनके कैश फ्लो पर दबाव बढ़ सकता है।
FMCG सेक्टर पर असर
बिस्किट, बेकरी और बेवरेज कंपनियों के लिए कच्चा माल होने की वजह से चीनी की कीमतें काफी मायने रखती हैं। हालांकि थोक कीमतों में हाल ही में गिरावट आई है, लेकिन सरकार का यह कदम कीमतों को स्टेबल रखने की कोशिश है। इसके अलावा, अक्टूबर 2026 तक कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की छूट जारी रखी गई है ताकि घरेलू स्तर पर सप्लाई बनी रहे। निवेशकों को अब मिलों के रियलाइजेशन प्राइस और फेस्टिव क्वार्टर में आने वाले रेवेन्यू पर पैनी नजर रखनी होगी।
