सप्लाई सिक्योरिटी को मिला बूस्ट
भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। देश, जो रोजाना करीब 5.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल इस्तेमाल करता है, अब अपनी जरूरत का लगभग 70% तेल ऐसे रास्तों से मंगा रहा है जो हॉरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे संवेदनशील इलाकों से होकर नहीं गुजरते। यह रणनीतिक बदलाव लगभग 40 देशों से आयात को शामिल करता है, जिससे समुद्री रास्तों पर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) से जुड़ा जोखिम काफी कम हो गया है।
रूसी कच्चे तेल का बढ़ा आयात
देश की रिफाइनरियां (Refineries) इन दिनों पूरी क्षमता से काम कर रही हैं, कुछ तो 100% से भी ऊपर चल रही हैं। इस शानदार परफॉर्मेंस की एक बड़ी वजह रूस से होने वाले कच्चे तेल के आयात में आई भारी बढ़ोतरी है। हाल ही में अमेरिकी प्रतिबंधों (Sanctions) में मिली कुछ छूट के बाद, भारत ने रूसी बैरल का आयात काफी बढ़ा दिया है। एनालिस्ट फर्म Kpler का अनुमान है कि फिलहाल रूस से रोजाना करीब 1.5 मिलियन बैरल तेल आ रहा है, और मार्च 2026 तक यह आंकड़ा 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन या उससे भी ऊपर जा सकता है। इस बड़ी खेप से भारत के एनर्जी रिजर्व (Energy Reserves) को काफी मजबूती मिली है।
एलपीजी (LPG) की उपलब्धता पर रहेगी नजर
कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों (Refined Products) की सप्लाई जहां सुरक्षित दिख रही है, वहीं अब सबकी नजर लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) के प्रोडक्शन पर है। रिफाइनरियों के पास फीडस्टॉक (Feedstock) और ऑपरेशनल पैरामीटर्स (Operational Parameters) को एडजस्ट करके एलपीजी प्रोडक्शन को बढ़ाने की फ्लेक्सिबिलिटी है। Kpler ने एलपीजी की उपलब्धता को भारत के एनर्जी बैलेंस (Energy Balance) के लिए एक अहम शॉर्ट-टर्म फैक्टर बताया है। सरकार रिफाइनरियों पर एलपीजी प्रोडक्शन बढ़ाने का जोर दे रही है, जिसे रूस, अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका (West Africa) जैसे देशों से लगातार मिल रहे कच्चे तेल का सहारा है। इसका मकसद वैश्विक अनिश्चितताओं (Global Uncertainties) के बीच एनर्जी की सप्लाई को बनाए रखना है।