Rice Export: अफ्रीकी देशों की भारी मांग से चावल के दाम में उछाल, भारत के सामने उत्पादन और महंगाई की दोहरी चुनौती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Rice Export: अफ्रीकी देशों की भारी मांग से चावल के दाम में उछाल, भारत के सामने उत्पादन और महंगाई की दोहरी चुनौती

अफ्रीकी देशों में फूड सिक्योरिटी को लेकर मची अफरा-तफरी के बीच भारत से चावल का आयात तेजी से बढ़ रहा है। ग्लोबल मार्केट में प्रोडक्शन **9%** गिरने के अनुमान के बीच भारतीय चावल की मांग में यह उछाल एक्सपोर्टर्स के लिए अवसर तो है, लेकिन घरेलू मोर्चे पर मानसून की बेरुखी और महंगाई का जोखिम भी बना हुआ है।

ग्लोबल मार्केट में चावल की सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता जा रहा है। साल 2026-27 के लिए ग्लोबल राइस प्रोडक्शन में 9% की गिरावट का अनुमान है, जबकि मांग 14% बढ़ने की उम्मीद है। इस उठापटक के बीच, 5% ब्रोकन पार्बॉयल्ड राइस की कीमतें $378 से $384 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई हैं, जो एक साल में सबसे ज्यादा है।

घरेलू उत्पादन और मानसून का संकट

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, लेकिन इस बार चुनौतियां कम नहीं हैं। देश में चावल के प्रोडक्शन में 6.5% यानी करीब 1 करोड़ टन की गिरावट आने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह मानसून में 15% की कमी है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में पानी की किल्लत से रबी सीजन की फसल पर भी असर पड़ने की आशंका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि Food Corporation of India के पास बफर नॉर्म्स से 2.7 करोड़ टन ज्यादा का स्टॉक मौजूद है, जो भारत को एक्सपोर्ट जारी रखने की ताकत दे रहा है।

एक्सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स का गणित

मिडल ईस्ट में जारी तनाव के कारण शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे एक्सपोर्टर्स के लिए मुनाफा बनाए रखना एक बड़ी चुनौती है। KRBL, LT Foods और Chaman Lal Setia जैसी कंपनियां बढ़ी हुई कीमतों का फायदा उठाने की स्थिति में हैं, लेकिन पॉलिसी में बदलाव का रिस्क हमेशा बना रहता है। सरकार अक्सर Sona Masuri और Swarna Masuri जैसे चावलों की बढ़ती घरेलू कीमतों को काबू में रखने के लिए एक्सपोर्ट पर पाबंदी लगा देती है।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

आने वाले समय में बाजार की नजरें मानसून के असर और सरकार के एक्सपोर्ट कोटा पर टिकी होंगी। एल निनो (El Niño) की स्थिति 2027 की शुरुआत तक बने रहने का अनुमान है, जो मौसम के लिए चिंताजनक है। अक्टूबर के अंत में होने वाली 'भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस' में कंपनियों की भविष्य की रणनीति और सप्लाई चेन चुनौतियों पर स्पष्टता मिल सकती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.