Indian Rice Exports: रिकॉर्ड **$12.95 बिलियन** का एक्सपोर्ट, अब क्वालिटी नियमों से चुनौती

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Rice Exports: रिकॉर्ड **$12.95 बिलियन** का एक्सपोर्ट, अब क्वालिटी नियमों से चुनौती

FY 2024-25 में भारत ने **20.1 मिलियन टन** चावल का निर्यात कर अपनी वैश्विक बादशाहत कायम रखी है, जिससे कुल **$12.95 बिलियन** की कमाई हुई है। हालांकि, अब विदेशी खरीदारों की ओर से सख्त क्वालिटी मानकों की मांग ने एक्सपोर्टर्स के लिए एक नया 'Pivot' तैयार कर दिया है।

भारत ने 2024-25 फाइनेंशियल ईयर में दुनिया के सबसे बड़े चावल निर्यातक के रूप में अपनी धाक जमाई है। इस दौरान देश से 20.1 मिलियन टन चावल भेजा गया, जिससे $12.95 बिलियन का रेवेन्यू हासिल हुआ। बासमती सेगमेंट का प्रदर्शन खास रहा, जिसने 6.07 मिलियन टन की मात्रा के साथ $5.94 बिलियन का योगदान दिया, जो पिछली अवधि के मुकाबले 15.7% की वृद्धि है। हालांकि, केवल वॉल्यूम ही अब बाजार में दबदबे की गारंटी नहीं है।

कंसंट्रेशन और कंप्लायंस का रिस्क

निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि भारत का चावल व्यापार मुख्य रूप से चुनिंदा देशों पर निर्भर है। भारत के बासमती चावल का 61% से ज्यादा हिस्सा सऊदी अरब, इराक, ईरान, यमन और यूएई जैसे देशों में जाता है। कुछ ही देशों पर यह निर्भरता एक बड़ा रिस्क पैदा करती है, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत से ज्यादा 'फूड सेफ्टी' को तवज्जो दे रहे हैं। यूरोपियन यूनियन जैसे बाजारों में पेस्टिसाइड रेजिड्यू (pesticide residue) को लेकर नियम सख्त हो रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ गया है।

'ट्रस्टेड ओरिजिन' की ओर बढ़ता कदम

भारतीय एक्सपोर्टर्स अब 'हाई-वॉल्यूम' के बजाय 'ट्रस्टेड ओरिजिन' (trusted origin) की पहचान बनाने पर जोर दे रहे हैं। पहले मिलों में ग्रेडिंग की कमी और फार्म लेवल पर केमिकल मैनेजमेंट की समस्याओं के कारण कई बार शिपमेंट नॉन-कंप्लायंट पाए गए, जिससे सेक्टर की साख को नुकसान पहुंचा। अब उत्पादकों, मिल मालिकों और पॉलिसीमेकर्स के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत है ताकि हर स्तर पर क्वालिटी को वेरिफाई किया जा सके।

निवेशकों के लिए लॉन्ग-टर्म सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां क्वालिटी सुधारने के दौरान अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे प्रोटेक्ट करती हैं। जो एक्सपोर्टर्स पारदर्शी और ट्रेस करने योग्य (traceable) सप्लाई चेन बनाने में सफल होंगे, वही भविष्य में हाई-वैल्यू वाले ग्लोबल मार्केट्स में टिक पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.