सितंबर 2026 में भारत की रिटेल महंगाई दर बढ़कर **5.54%** पर पहुंच गई है। इसकी बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों में **7.74%** का उछाल है। अकेले प्याज की कीमतें **113%** तक बढ़ गई हैं, जिसके चलते RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर **5.50%** कर दिया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में महंगाई का असर व्यापक है। कंज्यूमर अफेयर्स डिपार्टमेंट की मॉनिटरिंग में सामने आया है कि 41 में से 42 जरूरी कमोडिटीज के दाम पिछले साल के मुकाबले महंगे हो गए हैं। राहत की बात सिर्फ आलू के मोर्चे पर है, जिसकी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है।
प्याज और खाने-पीने की चीजों का गणित
प्याज की कीमतों में 113% का बड़ा उछाल आया है और इसका औसत भाव ₹53 प्रति किलो तक पहुंच गया है। सप्लाई में कमी और मॉनसून में देरी के कारण खरीफ फसल के अनुमान भी प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा, चीनी के भाव 22% और सूरजमुखी, पाम और सोया जैसी एडिबल ऑयल्स की कीमतें भी डबल डिजिट में बढ़ गई हैं। अरहर दाल जैसी जरूरी चीजें भी कई शहरों में ₹140 प्रति किलो के पार बिक रही हैं।
RBI का फैसला और मार्केट पर असर
बढ़ती महंगाई को थामने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% कर दिया है। जानकारों का मानना है कि ब्याज दरें बढ़ने से कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर उनके प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि जब आम आदमी की कमाई का बड़ा हिस्सा खाने-पीने की चीजों पर खर्च होगा, तो बाजार में 'डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग' यानी गैर-जरूरी खर्च घट सकता है। इसका असर FMCG और रिटेल सेक्टर की कंपनियों पर देखने को मिल सकता है। अब सबकी नजरें नई खरीफ फसल की आवक और सरकारी बफर स्टॉक से होने वाली सप्लाई पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर कुछ लगाम लग सकेगी।
