भारतीय गेहूं निर्यात ने फिर से रफ्तार पकड़ ली है। अगस्त के अंत से अब तक बांग्लादेश को **2,00,000** टन से ज्यादा गेहूं का ऑर्डर मिला है। वैश्विक बाजारों के मुकाबले भारतीय गेहूं सस्ता होने से ट्रेडर्स को बड़ा बूस्ट मिल रहा है, लेकिन घरेलू महंगाई और सरकारी पॉलिसी अभी भी सबसे बड़े रिस्क फैक्टर बने हुए हैं।
भारत एक बार फिर बांग्लादेश के लिए गेहूं का मुख्य सप्लायर बनकर उभरा है। मई 2022 में जब भारत ने घरेलू महंगाई को कंट्रोल करने के लिए गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी, उसके बाद यह पहली बार है जब इतनी बड़ी मात्रा में कारोबार हो रहा है। इस तेजी के पीछे की मुख्य वजह लॉजिस्टिक्स और सस्ता दाम है, जबकि ब्लैक सी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन अभी भी प्रभावित है।
सस्ता दाम और लॉजिस्टिक्स का फायदा
फिलहाल, बांग्लादेश को डिलीवरी के लिए भारतीय गेहूं की कीमत $305 से $326 प्रति टन के बीच है, जिसे रेल और सड़क मार्ग के जरिए आसानी से भेजा जा रहा है। वहीं, अगर ग्लोबल विकल्पों की बात करें, तो ऑस्ट्रेलियन गेहूं की कीमत $450 प्रति टन के पार पहुंच गई है। इस प्राइस एडवांटेज के कारण श्रीलंका ने भी भारत से लगभग 60,000 टन गेहूं का ऑर्डर दिया है।
सरकारी पॉलिसी और रिस्क
एक्सपोर्ट का फिर शुरू होना एग्री-ट्रेडर्स के लिए अच्छी खबर है, लेकिन भारत में फूड सिक्योरिटी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इतिहास गवाह है कि घरेलू महंगाई बढ़ने या स्टॉक कम होने पर सरकार तुरंत एक्सपोर्ट पर रोक लगा देती है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि रबी सीजन की फसल और घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव निर्यात नीतियों को कभी भी बदल सकते हैं।
भविष्य की राह
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के अनुमानों के मुताबिक, अगर भारत का प्राइस एडवांटेज बना रहता है, तो 2026/27 फाइनेंशियल ईयर तक गेहूं का कुल एक्सपोर्ट 20 लाख टन तक पहुंच सकता है। आने वाले समय में नेपाल, इंडोनेशिया और यूएई जैसे बाजारों से भी मांग बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन सब कुछ सरकार की अगली नीतियों पर निर्भर करेगा।
