भारत ने अपने क्रूड ऑयल आयात के सोर्सेज में बड़ा बदलाव किया है। अगस्त में वेनेजुएला से आयात बढ़कर **358,000 बैरल प्रति दिन** पहुंच गया है, जिससे वह भारत का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया है, जबकि सऊदी अरब अब चौथे स्थान पर खिसक गया है।
बदल गया तेल का गणित
अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने अपनी क्रूड ऑयल इंपोर्ट स्ट्रैटेजी को पूरी तरह रीकैलिब्रेट किया है। वेनेजुएला से तेल का आयात अब 358,000 बैरल प्रति दिन के स्तर पर पहुंच गया है, जिसने सऊदी अरब (339,000 बैरल प्रति दिन) को पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव भारतीय कंपनियों द्वारा पश्चिम एशिया की अस्थिरता से बचकर सस्ते एनर्जी सोर्सेज की तलाश का नतीजा है।
रिफाइनर्स के लिए क्या हैं मायने?
Reliance Industries जैसे बड़े रिफाइनर्स के लिए यह एक बड़ा मौका है। वेनेजुएला का क्रूड 'हैवी' और सल्फर युक्त होता है। जिन रिफाइनरीज के पास इसे प्रोसेस करने की क्षमता है, वे इसे काफी सस्ते दाम पर खरीद सकती हैं, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन में सुधार की गुंजाइश बनती है। हालांकि, इसके लिए हल्की क्रूड वैरायटी के साथ टेक्निकल ब्लेंडिंग करनी पड़ती है।
ONGC को मिली बड़ी राहत
इस पूरे घटनाक्रम में ONGC के लिए एक अहम खबर है। कंपनी को अमेरिकी ट्रेजरी के OFAC से वेनेजुएला में अपना कामकाज पूरी तरह बहाल करने की अनुमति मिल गई है। इस रेगुलेटरी क्लियरेंस से ONGC न केवल अपनी एसेट्स को बेहतर तरीके से मैनेज कर पाएगी, बल्कि वहां फंसे हुए डिविडेंड की रिकवरी का रास्ता भी साफ हो गया है।
मार्केट का रिस्क फैक्टर
हालांकि रूस अभी भी भारत का टॉप सप्लायर बना हुआ है, लेकिन अगस्त में वहां से आयात में 27% की गिरावट देखी गई। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि वेनेजुएला के इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की कमी के कारण सप्लाई में अनिश्चितता बनी रह सकती है। साथ ही, यह पूरा व्यापार अमेरिका द्वारा दिए गए लाइसेंस पर निर्भर है; यदि अमेरिकी नीति बदलती है, तो कंपनियों को बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
