त्योहारों के दौरान महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अक्टूबर के पहले पखवाड़े के लिए **14 लाख टन** चीनी का कोटा तय कर दिया है। यह कदम **2025-26** सीजन में सप्लाई की कमी और बढ़ती मांग को देखते हुए उठाया गया है।
फेस्टिवल सीजन पर सरकार की नजर
त्योहारी सीजन, खास तौर पर 20 अक्टूबर को होने वाले दशहरा के दौरान चीनी के दाम न बढ़ें, इसके लिए फूड मिनिस्ट्री ने सख्ती बरती है। नए निर्देश के तहत, शुगर मिलों को 45% कोटा पहले हफ्ते में और बाकी हिस्सा दूसरे हफ्ते में सप्लाई करना होगा। साथ ही, 'सेवन-डे डिस्पैच रूल' को अनिवार्य किया गया है, जिसके तहत सेल इनवॉइस बनने के 7 दिन के भीतर चीनी को फैक्ट्री से बाहर निकालना जरूरी है।
राज्यों का दबदबा
देश के कुल कोटे का करीब 83% हिस्सा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक से आता है। आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र को 4.39 लाख टन, उत्तर प्रदेश को 4.18 लाख टन और कर्नाटक को 2.20 लाख टन का कोटा मिला है। महाराष्ट्र में मिलें 15 अक्टूबर से और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 20 अक्टूबर के आसपास क्रशिंग ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में हैं।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
2025-26 के लिए कुल एलोकेशन 272 लाख टन रखा गया है, जो पिछले साल के मुकाबले 1.3% कम है। हालांकि देश में सालाना खपत 285-290 लाख टन के बीच रहने का अनुमान है। सरकार की यह कोटा नीति सप्लाई को संतुलित करने के लिए है, लेकिन यह शुगर कंपनियों के लिए दोधारी तलवार की तरह है। एक तरफ सप्लाई कम होने से कीमतें सपोर्ट पा सकती हैं, तो दूसरी तरफ सरकारी दखल के कारण कंपनियां मनचाहे दाम नहीं बढ़ा पा रही हैं, जिससे मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
