सरकार के इस कदम का सीधा असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मजबूत करने और गिरते रुपये को संभालने पर दिखेगा। दरअसल, भारतीय रुपया इस साल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5.6% कमजोर हो चुका है और माना जा रहा है कि साल के अंत तक यह ₹95 प्रति डॉलर के आसपास पहुंच सकता है। सरकार ने 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (Cess) को मिलाकर यह 15% का नया आयात शुल्क लगाया है। भारत का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) 2024-25 में $95 बिलियन था, जो कि अक्टूबर 2025 में अकेले $41.7 बिलियन पहुंच गया था। इसके अलावा, बढ़ती ग्लोबल ऑयल कीमतों के कारण आयात बिल में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल $690 बिलियन है, जो करीब 10-11 महीनों के आयात के लिए पर्याप्त है।
इस बड़े शुल्क बढ़ोतरी का असर ज्वेलरी (Jewelry) की मांग पर भी पड़ने की आशंका है। 2026 की पहली तिमाही (Q1 2026) में सोने के ज्वेलरी की खपत में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 19% की गिरावट आई है। भले ही घरेलू कीमतों में 81% की भारी बढ़ोतरी के कारण वैल्यू डिमांड बढ़ी हो, लेकिन ग्राहक अब हल्के या कम कैरट के गहनों को तरजीह दे रहे हैं। दूसरी ओर, निवेश (Investment) की मांग बढ़ी है। बार और कॉइन की खरीद में 34% का उछाल देखा गया, जो 2013 के बाद सबसे ज़्यादा है। इसी तरह, गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में भी रिकॉर्ड 20 टन का इनफ्लो आया है।
यह 15% का नया आयात शुल्क जुलाई 2024 में लागू किए गए 6% के शुल्क से एक बड़ा उलटफेर है। ऐसे में सोने की तस्करी (Smuggling) का खतरा एक बार फिर बढ़ सकता है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि अवैध बाजार फिर से सक्रिय हो सकते हैं, जिससे सरकार के विदेशी मुद्रा बचाने के लक्ष्य को झटका लग सकता है। इस नीतिगत बदलाव पर बाज़ार की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं, खासकर तब जब कुछ समय पहले सरकारी अधिकारियों ने ऐसे किसी भी टैरिफ बदलाव से इनकार किया था। यह स्थिति 2013 के पुराने घटनाक्रमों की याद दिलाती है, जब ड्यूटी बढ़ाने के बाद सरकार को पीछे हटना पड़ा था। वहीं, दूसरी ओर चीन 1 जून, 2026 से गोल्ड इम्पोर्ट लाइसेंसिंग को आसान बनाने की योजना बना रहा है।
इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी के सोने की खरीदारी कम करने की अपील के बाद ज्वेलरी कंपनियों जैसे कल्याण ज्वेलर्स (Kalyan Jewelers) और टाइटन (Titan) के शेयरों में गिरावट देखी गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) का अनुमान है कि 2026 में भारत की कुल सोने की मांग 650-750 टन के बीच रहेगी। वैश्विक स्तर पर, सोने की कीमतों में 2026 में मजबूती बने रहने की उम्मीद है, जहाँ विश्लेषक इसे $4,400 से $5,600 प्रति औंस तक देख रहे हैं। सेंट्रल बैंक की खरीदारी, जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित कटौती इसके प्रमुख कारक हैं। भारत के इस ड्यूटी हइक का अवैध व्यापार और चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) पर क्या असर पड़ता है, इस पर सबकी नज़र रहेगी।
