इम्पोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी: क्यों उठाया ये कदम?
यह फैसला देश की आर्थिक स्थिरता और वित्तीय सुरक्षा के लिए लिया गया है। खासकर जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) बढ़ रहा है और तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई हैं, जिससे भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ रहा है और भारतीय रुपया (Indian Rupee) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है। मई 2026 के शुरुआती दिनों में रुपया 95.64 के स्तर के करीब पहुंच गया था। देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी मई 2026 तक गिरकर लगभग $690.69 बिलियन रह गया था।
ज्वेलरी बाजार पर क्या होगा असर?
इस बड़े बदलाव का सीधा असर ज्वेलरी इंडस्ट्री पर भी पड़ने की उम्मीद है। Senco Gold जैसी बड़ी कंपनियों का अनुमान है कि इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से ज्वेलरी की बिक्री वॉल्यूम (Sales Volume) में 10-15% तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि, सोने की मौजूदा ऊंची कीमतों के कारण, बिक्री के मूल्य (Sales Value) में शायद ज्यादा फर्क न पड़े। लोग पहले से ही हल्के सोने के गहने खरीद रहे थे। इस खबर के बाद 13 मई, 2026 को Senco Gold सहित कई ज्वेलरी स्टॉक्स में 6.43% तक की गिरावट भी देखी गई।
आर्थिक दबाव और आगे का रास्ता
भारत तेल का बड़ा आयातक (Importer) है, और मध्य-पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें लगभग $103.8 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे व्यापार घाटा (Trade Balance) बढ़ता है, रुपया कमजोर होता है और महंगाई (Inflation) भी बढ़ सकती है, जो अप्रैल 2026 में 3.48% थी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) रुपया को स्थिर करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इन उपायों के साथ-साथ इम्पोर्ट पर लगाम लगाना भी जरूरी हो गया था।
क्या इससे स्मगलिंग बढ़ेगी?
यह पहली बार नहीं है जब सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी में बदलाव किया गया है। पहले जुलाई 2024 में इसे 15% से घटाकर 6% किया गया था, जिसके बाद सोने का इम्पोर्ट काफी बढ़ गया था। अब सरकार ने इसे वापस बढ़ा दिया है। हालांकि, इस बढ़ोतरी से कुछ चिंताएं भी जुड़ी हैं। अगर ड्यूटी बहुत ज्यादा हो जाती है, तो यह सोने की स्मगलिंग (Smuggling) को बढ़ावा दे सकती है, जिससे सरकार के इरादे पूरी तरह सफल नहीं हो पाएंगे और वैध कारोबारियों को नुकसान होगा।
