क्यों बढ़ाई गई सोने-चांदी की ड्यूटी?
आर्थिक दबावों के चलते भारत ने सोने और चांदी के इंपोर्ट पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी में भारी इजाफा किया है। यह बढ़ोतरी 6% से सीधे 15% कर दी गई है, जो कि जुलाई 2024 में की गई कटौती को पलटने जैसा है। इस कदम का मुख्य मकसद देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) को काबू में लाना है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बीच यह घाटा कमोडिटी इम्पोर्ट्स से और बढ़ सकता है। इसके साथ ही, सरकार गिरते भारतीय रुपये को भी मजबूती देना चाहती है, जो हाल के दिनों में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हुआ है।
सोने की कीमतों में उछाल, ज्वेलरी पर असर
ड्यूटी में इस भारी बढ़ोतरी का तत्काल असर घरेलू बाजारों में देखने को मिला। सोना और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल आया। जून डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) करीब 6% चढ़कर ₹1,62,648 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गए। इसी तरह, सिल्वर फ्यूचर्स (Silver Futures) में भी तेजी देखी गई। घरेलू बाजार में कीमतों में यह उछाल ग्लोबल मार्केट से कहीं ज्यादा है। जानकारों का मानना है कि इससे सोने के आभूषणों (Jewelry) की मांग पर तत्काल असर पड़ सकता है। खुदरा खरीदार इस बढ़ी हुई कीमत से बचने के लिए या तो हल्के डिजाइन पसंद कर सकते हैं या फिर पुराने सोने को गलाकर नए गहने बनवाने पर विचार कर सकते हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस घोषणा के बाद प्रमुख ज्वेलर्स के शेयरों में गिरावट भी देखी गई है, जिससे Titan Company जैसी कंपनियों पर दबाव आ सकता है।
बचत को फाइनेंशियल एसेट्स की ओर मोड़ने का प्रयास
केवल कीमतों पर असर ही नहीं, बल्कि इस ड्यूटी हाइक का एक बड़ा मकसद लोगों की बचत की आदत को बदलना भी है। नीति निर्माताओं की मंशा है कि लोग फिजिकल एसेट्स (Physical Assets) जैसे सोने में निवेश करने की बजाय म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) और ईटीएफ (ETFs) जैसे औपचारिक वित्तीय साधनों (Financial Products) की ओर रुख करें। यह ट्रेंड पहले से ही मजबूत है, क्योंकि अप्रैल 2026 में गोल्ड ईटीएफ (Gold ETFs) में काफी निवेश आया और पिछले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) में कमोडिटी ईटीएफ (Commodity ETFs) में भी अच्छी खासी राशि आई थी। इससे वित्तीय बचत को बढ़ावा मिल सकता है और स्थानीय शेयर बाजार (Capital Markets) को भी सहारा मिल सकता है।
तस्करी और पुरानी योजनाओं की चिंताएं
हालांकि, नई ड्यूटी से अवैध सोने की तस्करी (Smuggling) बढ़ने की चिंताएं भी खड़ी हो गई हैं। यह एक ऐसी समस्या है जो पिछली ड्यूटी कटौतियों के बाद कुछ कम हो गई थी। सरकार की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (Gold Monetization Scheme - GMS) जैसी पिछली योजनाओं को भी लोगों की सोने को फिजिकल रूप में रखने की मजबूत आदत और जागरूकता की कमी के कारण सीमित सफलता मिली थी। इस साल की शुरुआत में GMS डिपॉजिट्स को बंद करने से लोगों को अपने बेकार पड़े सोने का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना और भी मुश्किल हो गया है।
ग्लोबल डिमांड मजबूत
इन सबগুলোর बावजूद, सोने की ग्लोबल मांग (Global Demand) मजबूत बनी हुई है। दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (Central Banks) बड़े खरीदार बने हुए हैं, और इस साल भी उनके बड़ी मात्रा में सोने की खरीद जारी रहने का अनुमान है। यह 2022 से सेंट्रल बैंकों द्वारा औसत सालाना खरीद दोगुनी होने के ट्रेंड को जारी रखेगा। संस्थागत खरीदारों के अलावा, डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) और बाजार के जोखिमों से बचाव के लिए गोल्ड ईटीएफ में खुदरा निवेशकों की रुचि भी सोने की कीमतों को सहारा देती है। यह ड्यूटी हाइक आर्थिक स्थिरता के लिए एक अल्पकालिक रणनीति है, लेकिन इसकी सफलता इंपोर्ट कंट्रोल, सोने की सांस्कृतिक मांग और वित्तीय एसेट्स को पसंदीदा बचत विकल्प बनाने पर निर्भर करेगी।
