Gold Demand in India: ऊंची कीमतों ने बढ़ाई महंगाई, जून तिमाही में मांग **6%** घटकर **131 टन** पर आई

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gold Demand in India: ऊंची कीमतों ने बढ़ाई महंगाई, जून तिमाही में मांग **6%** घटकर **131 टन** पर आई

भारत में सोने की मांग जून तिमाही में **6%** घटकर **131 टन** रह गई। ऊंची कीमतों और इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी ने ज्वैलरी खरीदारों को हतोत्साहित किया। हालांकि, मांग की मात्रा (टन में) कम हुई, लेकिन कुल वैल्यू **50%** बढ़कर **₹1.98 लाख करोड़** हो गई। निवेशकों को बढ़े हुए इन्वेंटरी लेवल और गोल्ड-बैक्ड फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स के प्रति बदलते उपभोक्ता रुझान पर नज़र रखनी चाहिए।

कीमतों के दबाव में आई सोने की डिमांड

साल 2026 की जून तिमाही में भारत में सोने की मांग पर भारी दबाव देखने को मिला। कुल खपत 6% घटकर 131 टन पर आ गई। इसकी मुख्य वजह ज्वैलरी की मांग में आई 15% की भारी गिरावट रही, जो पिछले करीब दो दशकों में सबसे निचले स्तरों में से एक है। मार्केट के रुझानों से पता चलता है कि ग्राहक काफी सतर्क हो गए हैं और सोने की कीमतें पिछले साल की तुलना में लगभग 59% अधिक होने के कारण गैर-जरूरी खरीदारी को टाल रहे हैं।

इंपोर्ट ड्यूटी और कीमतों का असर

इस तिमाही में गोल्ड मार्केट को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इंपोर्ट ड्यूटी में 9% की बढ़ोतरी और लगातार कीमतों में उतार-चढ़ाव ने रिटेल खरीदारों को हतोत्साहित किया। मार्केट के विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ता की भावनाओं में बदलाव, सामाजिक और आर्थिक कारकों के साथ मिलकर फिजिकल ज्वैलरी की बिक्री को प्रभावित कर रहे हैं। ज्वैलर्स के सामने अब बढ़े हुए इन्वेंटरी लेवल की चुनौती है, जो 21 टन तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले 13 साल के औसत से काफी ऊपर है। अगर आने वाली तिमाहियों में मांग में सुधार नहीं होता है, तो यह बिना बिका स्टॉक बड़ी ज्वैलरी रिटेल चेन्स के वर्किंग कैपिटल पर दबाव डाल सकता है।

निवेश वाले सोने में मिली-जुली तस्वीर

जहां फिजिकल ज्वैलरी की मांग कमजोर पड़ी, वहीं निवेश वाले सोने के सेगमेंट में मिली-जुली तस्वीर देखने को मिली। गोल्ड बार और कॉइन की मांग 9% बढ़कर 50 टन हो गई। इससे पता चलता है कि कुछ निवेशक कीमतों में तेजी के बावजूद सोने को एक लॉन्ग-टर्म एसेट के तौर पर देख रहे हैं। इसके अलावा, गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) के जरिए निवेश 62% बढ़कर 4 टन पर पहुंच गया। हालांकि, पिछले तिमाही की तुलना में ईटीएफ में यह ग्रोथ काफी धीमी रही, जो मौजूदा कीमतों पर संस्थागत और रिटेल निवेशकों की रुचि में ठहराव का संकेत दे सकती है।

सप्लाई में कमी और ग्राहकों का व्यवहार

भारत में सोने की कुल सप्लाई छह साल के निचले स्तर 120 टन पर आ गई। नेट बुलियन इंपोर्ट में 22% की बड़ी गिरावट देखी गई, जो 98 टन रहा। दिलचस्प बात यह है कि पुराने गहनों को बेचकर कैश में बदलने की प्रक्रिया (रीसाइक्लिंग) 17% घटकर 19 टन रह गई, जो 11 तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है। यह व्यवहार दिखाता है कि भले ही कीमतें ऊंची हों, लेकिन लोग अपना फिजिकल गोल्ड बेचने के बजाय उसे अपने पास रख रहे हैं। कई उपभोक्ता ऐसा लगता है कि वे अपने सोने को स्थायी रूप से सरेंडर किए बिना लिक्विडिटी के लिए गोल्ड लोन का सहारा ले रहे हैं।

आगे चलकर, इस सेक्टर के लिए मुख्य बातें इंपोर्ट वॉल्यूम का ट्रेंड और यह देखना होगा कि क्या ज्वैलरी रिटेलर्स अपने इन्वेंटरी लेवल को सामान्य कर पाते हैं। ज्वैलरी और कीमती धातुओं के सेक्टर में निवेशक यह भी ट्रैक करेंगे कि क्या कीमतों में स्थिरता या आने वाले फेस्टिव सीजन से वॉल्यूम ग्रोथ वापस आ सकती है, या वैल्यू-ओवर-वॉल्यूम का ट्रेंड जारी रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.