India Pulse Exports: दालों के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल, GI-टैग वाली वैरायटी की मांग बढ़ी

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AuthorAditya Rao|Published at:
India Pulse Exports: दालों के निर्यात में रिकॉर्ड उछाल, GI-टैग वाली वैरायटी की मांग बढ़ी

भारत से दालों का निर्यात चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जुलाई 2026 की अवधि में **45%** बढ़कर **$452.27 मिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है। चीन, यूएई और बांग्लादेश जैसे देशों में बढ़ती मांग और प्रीमियम GI-टैग वाली दालों पर फोकस इस तेजी की बड़ी वजह है।

निर्यात में बड़ा उछाल

चालू फाइनेंशियल ईयर के पहले चार महीनों में भारत का दाल निर्यात शानदार रहा है। अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान निर्यात का आंकड़ा $452.27 मिलियन को पार कर गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 45% अधिक है। वॉल्यूम की बात करें, तो निर्यात 4.94 लाख टन तक पहुंच गया है, जिसमें 59% की भारी बढ़त देखी गई है। यह पिछले एक दशक में दालों के निर्यात में आई पांच गुना बढ़त को दर्शाता है।

प्रीमियम मार्केट पर दांव

भारत अब थोक कमोडिटी के बजाय प्रीमियम और GI-टैग वाली दालों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। हाल ही में कर्नाटक की 'कलबुर्गी तूर दाल' का मालदीव भेजा जाना इसका बड़ा उदाहरण है। मूंग, काबुली चना और दालों जैसी विशिष्ट किस्मों पर फोकस करने से किसानों को घरेलू बाजार के मुकाबले करीब 30% तक बेहतर दाम मिल रहे हैं।

ट्रेड पॉलिसी और चुनौती

दालों के एक्सपोर्ट में तेजी के बावजूद, भारत अभी भी नेट इम्पोर्टर बना हुआ है और हर साल घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 60 लाख टन दालों का आयात करना पड़ता है। India Pulses and Grains Association का कहना है कि सरकार को एक स्थिर लॉन्ग-टर्म ट्रेड फ्रेमवर्क बनाने की जरूरत है, ताकि 10 लाख टन निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के साथ-साथ घरेलू आपूर्ति भी सुरक्षित रहे।

निवेशकों के लिए अहम संकेत

लंबी अवधि में इस एक्सपोर्ट स्ट्रेटेजी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार एक्सपोर्ट कोटा और घरेलू महंगाई (Food Inflation) के बीच कैसे संतुलन बनाती है। निवेशकों को चीन, यूएई और बांग्लादेश से मिलने वाले डिमांड ट्रेंड्स और सरकारी पॉलिसी में होने वाले बदलावों पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.