भारत सरकार ने नाइजर से आ रहे सोयाबीन के भारी आयात की जांच शुरू कर दी है। डेटा के अनुसार, नाइजर में सालाना उत्पादन **100 टन** से कम है, जबकि वहां से **3.81 लाख टन** सोयाबीन आयात दिखाया गया, जिससे **45%** ड्यूटी चोरी का शक गहरा गया है।
क्या है पूरा मामला?
कस्टम्स अथॉरिटीज ने उन सोयाबीन शिपमेंट्स की जांच तेज कर दी है, जिन्हें पश्चिमी अफ्रीकी देश नाइजर से आयातित बताया गया था। 2026 के शुरुआती 7 महीनों में यह आयात आंकड़ा 3,80,868 टन तक पहुंच गया, जिसने सरकारी अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि नाइजर का कुल सालाना सोयाबीन प्रोडक्शन 100 मीट्रिक टन से भी कम है।
क्यों हो रही है जांच?
नियामकों को शक है कि सोयाबीन असल में किसी और देश, संभवतः नाइजीरिया से आ रहा है और इसे ड्यूटी-फ्री लाभ पाने के लिए 'मिस-लेबल' किया गया है। भारत में आमतौर पर सोयाबीन आयात पर 45% टैरिफ लगता है। अगर फ्रॉड साबित होता है, तो इम्पोर्टर्स को पुरानी तारीखों से भारी भरकम टैक्स का भुगतान करना पड़ सकता है।
बाजार पर असर
भारत का कुल सोयाबीन आयात 2026 के पहले 7 महीनों में 9,09,606 टन हो गया है, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह आंकड़ा महज 1,996 टन था। खराब मौसम के कारण घरेलू सप्लाई की कमी को पूरा करने के लिए कंपनियां विदेशी माल पर निर्भर थीं, लेकिन अब इस जांच के चलते नई खरीद पूरी तरह ठप हो गई है।
पोर्ट्स पर मौजूद शिपमेंट भी जांच के घेरे में हैं। आने वाले हफ्तों में सोयाबीन मील और एडिबल ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की पूरी संभावना है, क्योंकि इम्पोर्टर्स पर भारी टैक्स का बोझ उनकी प्रॉफिटेबिलिटी को सीधे चोट पहुंचा सकता है।
