वेजिटेबल ऑयल के बढ़ते इंपोर्ट और सुस्त त्योहारी मांग के चलते कांडला और हल्दिया जैसे बड़े पोर्ट्स पर भारी कंजेशन (Congestion) हो गया है। स्टोरेज फुल होने के कारण रिफाइनर्स पर दबाव बढ़ गया है और आने वाले महीनों में इंपोर्ट कम हो सकता है।
भारत का एडिबल ऑयल सेक्टर इन दिनों बड़ी लॉजिस्टिक चुनौती का सामना कर रहा है। कांडला और हल्दिया जैसे मुख्य पोर्ट्स पर कंजेशन की स्थिति इतनी गंभीर है कि करीब 3,00,000 मीट्रिक टन कार्गो 9 जहाजों पर फंसा हुआ है, जिन्हें अनलोड होने के लिए 10 दिन तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि पोर्ट के पास बने स्टोरेज टैंक पूरी तरह भर चुके हैं।\n\nयह संकट इंपोर्ट और घरेलू खपत के बीच भारी अंतर के कारण पैदा हुआ है। अगस्त 2026 में भारत ने 1.54 मिलियन टन एडिबल ऑयल का इंपोर्ट किया, जो पिछले 11 महीनों में सबसे अधिक था। कंपनियों ने त्योहारी सीजन की उम्मीद में जमकर खरीदारी की, लेकिन डिमांड उम्मीद से कहीं ज्यादा कमजोर रही।\n\nसरकार द्वारा 1 सितंबर 2026 से इंपोर्टेड एडिबल ऑयल की टैरिफ वैल्यू बढ़ाने से रिफाइनर्स की लागत पहले ही बढ़ चुकी है। अब जहाजों को समय पर खाली न कर पाने के कारण कंपनियों को भारी-भरकम 'डेमरेज चार्जेस' (Demurrage Charges) भी चुकाने पड़ रहे हैं, जो सीधे तौर पर इनके प्रॉफिट मार्जिन को चोट पहुंचा रहे हैं।\n\nइस भारी इन्वेंट्री को मैनेज करने के लिए रिफाइनर्स अब अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लिए अपने नए खरीद कॉन्ट्रैक्ट्स को घटाने की तैयारी में हैं। चूँकि भारत दुनिया के सबसे बड़े वेजिटेबल ऑयल इंपोर्टर्स में से एक है, इसलिए खरीदारी में कमी आने से इंटरनेशनल मार्केट में पाम ऑयल और सोया ऑयल की कीमतों पर भी दबाव देखने को मिल सकता है।
