भारत का सोना आयात जलवा
भारत दुनिया में सोने का एक बड़ा खरीदार है। देश हर साल 700-800 टन सोना आयात करता है, जिसकी कीमत $70 अरब से लेकर $95 अरब तक होती है। लेकिन इतनी बड़ी खपत के बावजूद, भारत की अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों पर कोई खास पकड़ नहीं है, क्योंकि ये कीमतें ग्लोबल मार्केट तय करता है।
बेकार पड़ी सोने की भारी संपत्ति
भारत की सबसे बड़ी दौलत यानी सोने का एक बड़ा हिस्सा लोगों की तिजोरियों और निजी वॉल्ट (vaults) में बंद पड़ा है। अनुमान है कि यह दुनिया के सबसे बड़े निजी गोल्ड स्टॉक में से एक है, जिसमें जबरदस्त आर्थिक क्षमता छिपी है।
एक्सचेंज के जरिए सोने को मोबिलाइज करने की योजना
इस योजना के तहत, देश में मजबूत बुलियन एक्सचेंज (bullion exchanges) स्थापित किए जाएंगे। ये प्लेटफॉर्म लोगों और संस्थाओं को अपने बेकार पड़े सोने को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस कदम से सोने का बाजार अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और लिक्विड (liquid) बन जाएगा।
ग्लोबल प्राइस पर असर डालने का लक्ष्य
घरेलू सोने के भंडार को सक्रिय करके और एक परिष्कृत ट्रेडिंग सिस्टम बनाकर, भारत का लक्ष्य सिर्फ एक उपभोक्ता देश से आगे बढ़कर ग्लोबल गोल्ड हब बनना है। इस बदलाव से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है और भारत की बड़ी खपत के अनुरूप वैश्विक सोने की कीमतों को तय करने में उसकी आवाज मजबूत हो सकती है।
