सरकार ने गेहूं और आटे के एक्सपोर्ट को 'Prohibited' कैटेगरी से हटाकर 'Free' कर दिया है। **121 मिलियन टन** के बंपर प्रोडक्शन और मजबूत बफर स्टॉक के चलते भारत अब ग्लोबल मार्केट में बड़ी हिस्सेदारी निभाने की तैयारी में है।
भारत सरकार ने ट्रेड पॉलिसी में बड़ा बदलाव करते हुए गेहूं और आटे के एक्सपोर्ट के दरवाजे खोल दिए हैं। DGFT की लेटेस्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब इन्हें 'Free' स्टेटस में रखा गया है। यह फैसला 121 मिलियन टन के रिकॉर्ड उत्पादन के बाद लिया गया है, जिससे देश में सरप्लस स्टॉक उपलब्ध है।\n\n### ग्लोबल मार्केट में भारत की रणनीति\n2026-27 के लिए ग्लोबल गेहूं प्रोडक्शन के 819 मिलियन टन तक गिरने का अनुमान है, जिससे एशिया और मिडिल ईस्ट में सप्लाई की कमी पैदा हो रही है। भारत का मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) अंतरराष्ट्रीय कीमतों के मुकाबले काफी आकर्षक है, जो भारतीय गेहूं को ग्लोबल इम्पोर्टर्स के लिए एक बेहतर विकल्प बनाता है।\n\n### निवेश और बिजनेस पर असर\nयह फैसला उन कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है जो एग्रीकल्चरल प्रोसेसिंग, स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में हैं। एक्सपोर्ट बढ़ने से फ्लोर मिलर्स की कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बेहतर होगी और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनियों को भी फायदा मिलेगा।\n\n### रिस्क फैक्टर और महंगाई पर नजर\nनिवेशकों को इस मौके के साथ-साथ कुछ रिस्क भी समझने होंगे। सबसे बड़ा फोकस 'फूड इन्फ्लेशन' पर है। अगर घरेलू बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तो सरकार भविष्य में एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव कर सकती है, जैसा कि पहले भी देखा गया है। इसके अलावा, पोर्ट की लॉजिस्टिकल एफिशिएंसी और क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर भी एक्सपोर्ट की सफलता टिकी होगी। फिलहाल मार्केट की नजर मंथली एक्सपोर्ट डेटा और घरेलू कीमतों के ट्रेंड पर रहेगी।
