Indian Bureau of Mines ने 'National Mineral Exchange' स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पहल का मकसद देश में मिनरल ट्रेडिंग को डिजिटल और केंद्रीकृत (Centralized) करना है। बोली लगाने वाली कंपनियों की नेटवर्थ कम से कम **₹50 करोड़** होनी चाहिए और आवेदन की अंतिम तारीख **2 नवंबर, 2026** है।
क्या है सरकार का प्लान?
Indian Bureau of Mines ने देश का पहला 'National Mineral Exchange' बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार का मुख्य उद्देश्य माइनिंग सेक्टर को निजी और अस्पष्ट सौदों से बाहर निकालकर एक ट्रांसपेरेंट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाना है। इस एक्सचेंज के जरिए आयरन, क्रोमाइट, बॉक्साइट, लाइमस्टोन और मैंगनीज जैसे प्रमुख खनिजों की ट्रेडिंग को सुव्यवस्थित किया जाएगा।
ऑपरेटर के लिए कड़ी शर्तें
सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए लंबे समय के साझेदार की तलाश में है, इसलिए सफल ऑपरेटर का रजिस्ट्रेशन 25 साल के लिए वैध होगा। हालांकि, इसमें भाग लेने के लिए कंपनियों को ₹50 करोड़ की न्यूनतम नेटवर्थ का क्राइटेरिया पूरा करना होगा। यह शर्त इसलिए रखी गई है ताकि केवल वित्तीय रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से सक्षम कंपनियां ही इस हाई-वॉल्यूम प्लेटफॉर्म का प्रबंधन कर सकें।
मार्केट पर क्या होगा असर?
यह बदलाव मौजूदा ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए एक बड़ा चुनौतीपूर्ण कदम है। नए नियमों के लागू होने और एक्सचेंज के ऑपरेशनल होने के बाद, पुराने प्लेटफॉर्म्स को 6 महीने का समय दिया जाएगा ताकि वे खुद को नए नियमों के तहत रजिस्टर कर सकें। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं, तो उन्हें अपना कामकाज बंद करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया का लक्ष्य 2027-28 फाइनेंशियल ईयर तक एक्सचेंज को पूरी तरह चालू करना है। निवेशकों और इंडस्ट्री के लोगों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह प्लेटफॉर्म वास्तव में प्राइस डिस्कवरी (Price Discovery) को और अधिक पारदर्शी बना पाता है या नहीं।
