भारत सरकार ने कोयला ट्रेडिंग के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए 'कोल एक्सचेंज रूल्स, 2026' को अधिसूचित कर दिया है। इसका मकसद कोयले की कीमतों को लॉन्ग-टर्म सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स से हटाकर बाजार आधारित बनाना है, जिससे 2030 तक **1.5 बिलियन टन** उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।
क्या है नई व्यवस्था?
सरकार ने अब देश भर में डेडिकेटेड कोयला एक्सचेंजों की स्थापना के लिए एक रेगुलेटरी फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है। 'कोल एक्सचेंज रूल्स, 2026' के तहत, कोयले का कारोबार अब सीमित ऑक्शन और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि एक ओपन मार्केट-बेस्ड प्राइस डिस्कवरी मॉडल की ओर बढ़ेगा। इस पूरे सिस्टम की निगरानी कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन (Coal Controller Organisation) करेगी, जो पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करेगी। शुरुआती दौर में, इन नियमों में डेरिवेटिव्स (derivatives) को शामिल नहीं किया गया है ताकि बाजार को परिपक्व होने का मौका मिले।
निवेशकों के लिए क्यों अहम?
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