DGFT ने व्यापार को संतुलित करने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सपोर्ट करने के मकसद से आयात नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। सरकार ने हीरे जड़े चांदी के गहनों के आयात पर 30 जून 2026 तक के लिए रोक लगा दी है। यह कदम खासकर उन गहनों पर लागू होता है जिनमें सस्ते हीरे जड़े होते हैं, और इसका मुख्य मकसद उन मार्केट सेगमेंट्स को बचाना है जहाँ विदेशी, खासकर ASEAN देशों से प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा थी।
इस नियम के तहत, हीरे जड़े चांदी के गहनों के आयात को 'फ्री' (Free) कैटेगरी से हटाकर 'रेस्ट्रिक्टेड' (Restricted) कर दिया गया है। यह फैसला विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशियाई देशों (ASEAN) से हो रहे बड़े आयात को लक्षित करता है। इंडस्ट्री का मानना है कि यह कदम प्रतिस्पर्धी कीमतों को सीमित करेगा, जिससे घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो रहा था। चांदी की मौजूदा कीमत लगभग ₹75,000 प्रति किलोग्राम है, और यह सेक्टर मास-मार्केट ज्वेलरी का एक अहम हिस्सा है।
यह नया नियम पहले से लागू आयात प्रतिबंधों (जो अप्रैल 2026 तक प्रभावी हैं) के साथ मिलकर घरेलू ज्वेलरी इंडस्ट्री पर चल रहे दबाव को दिखाता है। अक्टूबर 2025 के आंकड़ों के अनुसार, सेक्टर की कमजोरी साफ दिख रही है - ग्रॉस एक्सपोर्ट्स (Gross Exports) 30.57% गिरे, वहीं इम्पोर्ट्स (Imports) 19.2% कम हुए। ग्लोबल इकोनॉमी की अनिश्चितताएँ, जैसे कि 2026 की शुरुआत में धीमी ग्रोथ का अनुमान और जियोपॉलिटिकल रिस्क, बड़े मार्केट्स जैसे अमेरिका, यूरोप और चीन में मांग को प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय रुपये का 83 के आसपास US Dollar के मुकाबले कमजोर रहना भी आयात-निर्यात को और जटिल बना रहा है।
इस आयात रोक का असर इंडस्ट्री में अलग-अलग कंपनियों पर अलग-अलग पड़ेगा। मार्केट लीडर Titan Company, जिसका मार्केट कैप लगभग ₹3.5 ट्रिलियन और P/E लगभग 60x है, ने 2025 और 2026 की शुरुआत में स्थिर प्रदर्शन बनाए रखा है। वहीं, Kalyan Jewellers, जिसका मार्केट कैप करीब ₹400 बिलियन और P/E 35x है, ने भी 2026 की शुरुआत में अच्छा मोमेंटम दिखाया है। विश्लेषकों का नजरिया सतर्कता के साथ सकारात्मक है।
हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह पॉलिसी केवल 'सस्ते हीरे जड़े चांदी के गहनों' पर केंद्रित है। Titan जैसी बड़ी भारतीय ज्वेलरी कंपनियां गोल्ड ज्वेलरी और महंगे हीरे वाले सेगमेंट में भी काफी मजबूत हैं, जहाँ आयात के नियम अलग हैं और ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर पड़ सकता है। ASEAN देशों द्वारा जवाबी कार्रवाई या निर्यात को दूसरी दिशा में मोड़ने की संभावना भी बनी रहेगी।
DGFT का यह फैसला ट्रेड इम्बैलेंस को संभालने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की एक सक्रिय कोशिश को दर्शाता है। इन प्रतिबंधों की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इनका कितनी सख्ती से पालन होता है और व्यापारिक भागीदार कैसे प्रतिक्रिया देते हैं। यह दिखाता है कि सरकार कीमती धातुओं और ज्वेलरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षात्मक उपायों को जारी रख सकती है। भारत 2026 तक स्थानीय औद्योगिक उत्पादन को बढ़ाने के लक्ष्य के साथ ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
