डॉलर में गिरावट, पर रुपये में लेदर एक्सपोर्ट का दम बरकरार
फाइनेंशियल ईयर 2026 में भारत के लेदर सेक्टर ने डॉलर के मुकाबले 1.6% का संकुचन झेला, जिससे एक्सपोर्ट $4.75 बिलियन पर आ गया। लेकिन, जब इन आंकड़ों को भारतीय रुपये में देखा गया, तो एक्सपोर्ट में 2.62% की शानदार बढ़ोतरी हुई और यह ₹41,902 करोड़ पर पहुंच गया। यह दिखाता है कि भले ही वैश्विक करेंसी के उतार-चढ़ाव और बाहरी दबावों ने रिपोर्ट किए गए आंकड़ों को प्रभावित किया हो, लेकिन घरेलू मांग और इंडस्ट्री की अंदरूनी ताकत बनी रही। पिछले फाइनेंशियल ईयर में जहां लगभग 3% की ग्रोथ दर्ज की गई थी, वहीं इस बार के आंकड़े बाजार की बदलती गतिशीलता की ओर इशारा करते हैं।
अलग-अलग सेगमेंट का प्रदर्शन
सेक्टर के प्रदर्शन में इसके उप-खंडों के बीच काफी अंतर देखने को मिला। लेदर गारमेंट्स एक स्टार परफॉर्मर बनकर उभरे, जिनमें रुपये के लिहाज से 23% की भारी बढ़ोतरी हुई। इसी तरह, सैडलरी और हार्नेस, नॉन-लेदर फुटवियर और फुटवियर कंपोनेंट्स ने भी मजबूत ग्रोथ दिखाई। हालांकि, लेदर गुड्स और फिनिश्ड लेदर के एक्सपोर्ट में आई गिरावट ने इस ग्रोथ को कुछ हद तक कम कर दिया। यह इंडस्ट्री के भीतर अलग-अलग प्रतिस्पर्धी लाभों और बाजार की मांगों को दर्शाता है।
भू-राजनीतिक और टैरिफ का असर
FY26 के दूसरे हाफ में एक स्पष्ट मंदी देखी गई, जिसका सीधा संबंध अमेरिका द्वारा लगाए गए बढ़ते टैरिफ और पश्चिम एशिया में जारी संकट से था। क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण बढ़े हुए फ्रेट कॉस्ट, बीमा प्रीमियम और लॉजिस्टिक्स में देरी ने सप्लाई चेन में बड़ी अनिश्चितताएं पैदा कीं और एक्सपोर्ट की प्रतिस्पर्धात्मकता को कम कर दिया। अमेरिका, जो एक प्रमुख बाजार है, ने 50% का एक बड़ा टैरिफ लागू किया था, जिसे बाद में फरवरी 2026 में 10% एड वैलोरम सरचार्ज में बदल दिया गया। इससे भविष्य के व्यापार के लिए कुछ राहत मिल सकती है।
यूरोपीय बाजार के मिले-जुले संकेत और भविष्य की संभावनाएं
यूरोप, जो भारत के लेदर एक्सपोर्ट का लगभग 55% हिस्सा है, वहां मिले-जुले संकेत मिले। जर्मनी, यूके, इटली और फ्रांस जैसे प्रमुख बाजारों में शिपमेंट में कमी दर्ज की गई, जबकि स्पेन और नीदरलैंड्स में एक्सपोर्ट ग्रोथ सकारात्मक रही। FY27 में भारत-ईयू और भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTAs) के अंतिम रूप से तैयार होने की उम्मीद है, जो ड्यूटी-फ्री एक्सेस प्रदान कर सकता है और एक्सपोर्ट वॉल्यूम को काफी बढ़ा सकता है।
उभरते बाजारों में उम्मीदें
पारंपरिक व्यापारिक भागीदारों के अलावा, भारतीय लेदर सेक्टर ने FY26 के दौरान UAE, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे उभरते देशों में अपनी पहुंच सफलतापूर्वक बढ़ाई है। यह एक्सपोर्ट डेस्टिनेशन के रणनीतिक विविधीकरण का संकेत देता है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक ग्रोथ 3.2% रहने का अनुमान लगाया है, जो व्यापार में रिकवरी के लिए एक सहायक माहौल प्रदान कर सकता है। हालांकि, भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर बने हुए हैं।
