अंतर्राष्ट्रीय गैस यूनियन (IGU) की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत के लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) आयात में **15 लाख टन** की गिरावट आई है। आयात कम होने के बावजूद, देश ने अपनी रीगैसीफिकेशन क्षमता में **71 लाख टन प्रति वर्ष** का विस्तार किया है। यह इंफ्रास्ट्रक्चर ग्रोथ और घटते यूटिलाइजेशन रेट (utilization rates) का मेल, भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रबंधन में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।
वैश्विक LNG मार्केट में नरमी, भारत का इम्पोर्ट घटा
2025 में वैश्विक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) मार्केट में नरमी का रुख देखा गया, खासकर प्रमुख एशियाई देशों के आयात में खास गिरावट आई। अंतर्राष्ट्रीय गैस यूनियन (IGU) की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के कैलेंडर वर्ष में भारत का LNG इम्पोर्ट 15 लाख टन (mt) घटकर 24.60 mt पर आ गया। यह गिरावट एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के व्यापक ट्रेंड का हिस्सा थी, जहां कुल आयात 92 लाख टन (mt) घटकर 108.7 mt हो गया।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस, क्षमता में बड़ा इजाफा
आयात में कमी के बावजूद, भारत ने अपने दीर्घकालिक ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित रखा। देश ने 71 लाख टन प्रति वर्ष (mtpa) नई रीगैसीफिकेशन क्षमता जोड़ी। इसमें छाछरा LNG टर्मिनल (5 mtpa) का चालू होना और दाभोल सुविधा का विस्तार (2.1 mtpa) शामिल है। यह विस्तार महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने भारत को रीगैसीफिकेशन क्षमता के मामले में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बाजार बना दिया है, जहां आठ चालू टर्मिनलों के साथ कुल क्षमता 52.5 mtpa तक पहुंच गई है।
टर्मिनल यूटिलाइजेशन पर असर
आयात में गिरावट और नई इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता के जुड़ने के कारण टर्मिनल यूटिलाइजेशन रेट में उल्लेखनीय कमी आई। 2025 में भारत की रीगैसीफिकेशन यूटिलाइजेशन रेट घटकर लगभग 47% रह गई, जो 2024 में 58% थी। निवेशकों के लिए, यह गिरावट दर्शाती है कि भविष्य की मांग के लिए क्षमता का निर्माण तो हो रहा है, लेकिन वर्तमान इंफ्रास्ट्रक्चर अपनी अधिकतम क्षमता से काफी नीचे चल रहा है। आयात की मात्रा में आनुपातिक वृद्धि के बिना अधिक क्षमता, इन पूंजी-गहन परियोजनाओं के वित्तीय रिटर्न पर दबाव डाल सकती है।
भविष्य का आउटलुक और विस्तार की योजना
इस सेक्टर की दीर्घकालिक रणनीति आपूर्ति की सुरक्षा को प्राथमिकता देती दिख रही है। भारत के पास वर्तमान में पाइपलाइन में चार प्रमुख LNG प्रोजेक्ट हैं, जिनसे 2028 तक कुल 11.3 mtpa क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। इसमें देश की सबसे बड़ी सुविधा, दाहेज LNG टर्मिनल का नियोजित विस्तार भी शामिल है।
निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या घरेलू मांग की वृद्धि इस तेज इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार की गति को पकड़ पाती है। इन संपत्तियों का प्रदर्शन वैश्विक मूल्य रुझानों पर बहुत अधिक निर्भर करेगा, जो आयात की लागत को प्रभावित करते हैं, और औद्योगिक व बिजली क्षेत्रों द्वारा प्राकृतिक गैस की खपत की गति पर भी। आने वाले वर्षों में जैसे-जैसे अतिरिक्त क्षमता ऑनलाइन आएगी, उद्योग के लिए मुख्य निगरानी योग्य मेट्रिक यूटिलाइजेशन रेट्स की प्रवृत्ति होगी, क्योंकि ये मेट्रिक्स नई जोड़ी गई इंफ्रास्ट्रक्चर की आर्थिक व्यवहार्यता को सीधे दर्शाते हैं।
