भारत के जेम एंड ज्वेलरी सेक्टर ने अगस्त 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक्सपोर्ट में **12.52%** की ग्रोथ दर्ज की है, जिसका कुल मूल्य **₹21,945.87 करोड़** रहा। इस तेजी के पीछे स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी की मांग में आई **64.96%** की बड़ी उछाल मुख्य वजह है।
भारत का जेम एंड ज्वेलरी सेक्टर अब 'वैल्यू-एडिशन' की राह पर है। मैन्युफैक्चरर्स अब साधारण प्रोसेसिंग के बजाय हाई-वैल्यू, डिजाइन-लेड प्रोडक्शन पर जोर दे रहे हैं। अगस्त में स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी का एक्सपोर्ट $642.85 मिलियन तक पहुंच गया, जो इस नई रणनीति की सफलता का प्रमाण है। इस कदम का मकसद लो-मार्जिन वाली वोलेटिलिटी से बचकर ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमाना है।
डायमंड सेगमेंट का गणित
डायमंड सेक्टर की तस्वीर थोड़ी पेचीदा है। हालांकि कट और पॉलिश्ड डायमंड्स का एक्सपोर्ट वॉल्यूम पिछले साल के 12.94 लाख कैरेट से बढ़कर 13.36 लाख कैरेट हो गया है, लेकिन वैल्यू रियलाइजेशन पर दबाव बना हुआ है। इसका सीधा मतलब है कि डिमांड तो है, लेकिन कीमतों में दम नहीं दिख रहा। निवेशकों के लिए कंपनी की कॉस्ट मैनेजमेंट क्षमता और प्रॉफिट मार्जिन पर नजर रखना बेहद जरूरी हो गया है।
आगे की राह और चुनौतियां
सेक्टर के सामने ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता और वेस्ट एशिया के जियो-पॉलिटिकल तनाव जैसे रिस्क अभी भी बने हुए हैं। सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे तौर पर वर्किंग कैपिटल पर दबाव डालता है। हालांकि, बाजार की नजरें अब India-UK Free Trade Agreement पर टिकी हैं। यह एग्रीमेंट $4 बिलियन के बड़े मार्केट तक जीरो-ड्यूटी एक्सेस दिला सकता है, जो आने वाली तिमाहियों में एक्सपोर्ट के लिए बड़ा बूस्टर साबित हो सकता है।
