संघर्ष का निर्यात पर असर
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारत के रत्नों और आभूषणों के निर्यात पर पड़ा है। मार्च महीने में कुल एक्सपोर्ट में 35.23% की बड़ी गिरावट देखी गई। इस गिरावट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में छिड़ा संघर्ष रहा, जिसने व्यापार मार्गों को बाधित किया और शिपिंग की बीमा लागत को काफी बढ़ा दिया। खास तौर पर, कट और पॉलिश किए गए हीरों (CPD) के निर्यात में अकेले मार्च में 27.48% की कमी आई। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की बात करें, तो रत्नों और आभूषणों के कुल निर्यात में मामूली 3.32% की गिरावट आई, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के लगभग $28.7 बिलियन से घटकर $27.7 बिलियन रह गया।
चांदी की चमक, हीरों पर दबाव
जहां एक ओर हीरे के निर्यात पर दबाव देखा गया, वहीं चांदी के आभूषणों के निर्यात ने शानदार प्रदर्शन किया। पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में चांदी के आभूषणों का निर्यात 52.21% बढ़कर $1.47 बिलियन तक पहुंच गया। यह मजबूत वृद्धि सोने के आभूषणों के निर्यात के विपरीत है, जो काफी हद तक स्थिर रहा। पॉलिश किए गए हीरों में पूरे फाइनेंशियल ईयर में 8.52% की गिरावट दर्ज की गई। यह अंतर कंज्यूमर की मांग में बदलाव का संकेत दे सकता है, खासकर मौजूदा आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए।
रफ डायमंड हब बनने की कोशिश
इन चुनौतियों के बीच, जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) भारत को रफ डायमंड (कच्चे हीरे) के ट्रेडिंग हब के तौर पर स्थापित करने की दिशा में जोर-शोर से लगी है। GJEPC के चेयरमैन किरित भंसाली ने कहा कि भारत के पास हीरे काटने और पॉलिश करने की बेहतरीन विशेषज्ञता है, जिसका फायदा उठाया जा सकता है। यूएई जैसी कंपनियों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। सरकार के समर्थन से, भारत का लक्ष्य पॉलिश किए गए रत्नों से आगे बढ़कर रफ डायमंड के व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना है।
हब बनने की राह में रोड़े
हालांकि, भारत को रफ डायमंड ट्रेडिंग हब बनाने की राह आसान नहीं है। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता नए व्यापारिक ऑपरेशन्स के लिए जोखिम पैदा करती है। इस लक्ष्य को पाने के लिए केवल पॉलिशिंग स्किल्स ही काफी नहीं हैं; मजबूत वित्तीय ढांचा, कुशल रेगुलेशन और खनन स्रोतों से मजबूत संबंध जैसे कई पहलू अहम हैं। दुबई जैसे स्थापित केंद्रों के पास पहले से ही फायदे हैं। यह सेक्टर वैश्विक आर्थिक मंदी और भू-राजनीतिक झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है।
भविष्य का outlook
GJEPC को उम्मीद है कि अगले दो से तीन महीनों में भू-राजनीतिक तनावों के स्थिर होने के साथ निर्यात में सुधार दिखेगा। एक्सपोर्ट की निर्भरता कम करने के लिए काउंसिल नए बाजारों की तलाश कर रही है। उद्योग विश्लेषकों का मानना है कि अगर सेक्टर वैश्विक व्यापार की गतिशीलता के साथ तालमेल बिठाता है और सहायक नीतियों के साथ रफ डायमंड ट्रेडिंग जैसी खास मौकों पर ध्यान केंद्रित करता है, तो भविष्य में सकारात्मक outlook बना रहेगा।