Mineral Exchange: भारत का पहला मिनरल एक्सचेंज जल्द, सरकार ने मांगे आवेदन

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Mineral Exchange: भारत का पहला मिनरल एक्सचेंज जल्द, सरकार ने मांगे आवेदन

Ministry of Mines ने भारत के पहले मिनरल एक्सचेंज को स्थापित करने के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसका लक्ष्य फाइनेंशियल ईयर 2027-28 तक कामकाज शुरू करना है, जिससे माइनिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी।

आवेदन प्रक्रिया और शर्तें

सरकार ने आधिकारिक तौर पर मिनरल एक्सचेंज के डिजाइन और संचालन के लिए आवेदन मांगे हैं। जो कंपनियां इस क्षेत्र में उतरना चाहती हैं, उन्हें 2 नवंबर 2026 तक आवेदन करना होगा। योग्यता के लिए कंपनी की नेट वर्थ कम से कम ₹50 करोड़ होनी चाहिए। यह एक्सचेंज जून 2026 के 'मिनरल एक्सचेंज रूल्स' के तहत काम करेगा।

किन खनिजों की होगी ट्रेडिंग?

शुरुआती दौर में यह प्लेटफॉर्म पांच मुख्य औद्योगिक खनिजों पर केंद्रित होगा: आयरन ओर, क्रोमाइट, बॉक्साइट, लाइमस्टोन, और मैंगनीज। हालांकि, कोयला, लिग्नाइट और परमाणु खनिजों को फिलहाल इसके दायरे से बाहर रखा गया है। इंडियन ब्यूरो ऑफ माइन्स (IBM) नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगी और बाजार की पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी।

क्यों है यह बदलाव जरूरी?

अभी तक खनिजों का कारोबार सीधे उत्पादकों और बड़े खरीदारों के बीच या फिर छोटे ई-ऑक्शन के जरिए होता है। इससे कीमतों में पारदर्शिता की कमी रहती है। नया एक्सचेंज एक केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म (Centralized Platform) प्रदान करेगा, जिससे छोटे औद्योगिक खिलाड़ियों को भी बेहतर मार्केट एक्सेस मिलेगा।

MCX की दिलचस्पी

इस पहल में Multi Commodity Exchange of India (MCX) ने भी रुचि दिखाई है। उम्मीद है कि यह कदम माइनिंग सेक्टर को बिजली और नेचुरल गैस जैसे अन्य कमोडिटी मार्केट की तरह व्यवस्थित बना देगा। हालांकि, सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने बड़े उत्पादक इस प्लेटफॉर्म को अपनाते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नया एक्सचेंज शुरू होने के 6 महीने बाद अनरजिस्टर्ड एक्सचेंजों का कामकाज बंद करना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.