भारत ने जूट स्टॉक पर लगाई सीमाएँ, कच्चे जूट की कीमत में मामूली नरमी

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AuthorNeha Patil|Published at:
भारत ने जूट स्टॉक पर लगाई सीमाएँ, कच्चे जूट की कीमत में मामूली नरमी
Overview

भारतीय सरकार ने जूट आयुक्त के कार्यालय के माध्यम से, कच्चे जूट व्यापारियों, बेलर्स और मिलों के लिए नई स्टॉकहोल्डिंग सीमाएँ लागू की हैं। यह कदम कच्चे जूट की कीमतों में तेज उछाल के बाद उठाया गया है, जो 18 जनवरी 2026 को ₹13,500 प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थी, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊपर है। हालांकि कीमतों में मामूली सुधार हुआ है, उद्योग में निरंतर अस्थिरता की आशंका है।

जूट बाज़ार को स्थिर करने के लिए नियामक कार्रवाई

केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय ने व्यापार के विभिन्न खंडों में कड़े स्टॉकहोल्डिंग सीमाएँ लागू करके अस्थिर कच्चे जूट बाज़ार को प्रबंधित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई की है। जूट आयुक्त के कार्यालय द्वारा 19 जनवरी 2026 को जारी एक अधिसूचना में, नए कैप स्थापित किए गए हैं जिनका उद्देश्य जमाखोरी को रोकना और कच्चे जूट का अधिक समान वितरण सुनिश्चित करना है।

संशोधित मानदंडों के तहत, ऑन-प्रिमाइसेस बेलिंग प्रेस वाले कच्चे जूट बेलर्स को अधिकतम 1,200 क्विंटल तक रखने की अनुमति है। अन्य पंजीकृत स्टॉकस्टों के लिए 25 क्विंटल की सीमा है, जबकि अपंजीकृत व्यापारियों को केवल 5 क्विंटल तक सीमित रखा गया है। जूट मिलों और प्रसंस्करण इकाइयों को उनकी वर्तमान खपत दरों के 45 दिनों तक के बराबर कच्चे जूट स्टॉक रखने की अनुमति होगी। ये उपाय कच्चे जूट की कीमतों में तेज वृद्धि के बाद प्रभावी हुए हैं, जो 18 जनवरी 2026 को ₹13,500 प्रति क्विंटल पर चरम पर पहुंच गई थी [cite: Source A, 9, 22, 25], जो 2025-26 सीज़न के लिए सरकार द्वारा स्वीकृत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹5,650 प्रति क्विंटल से काफी अधिक है। सरकार ने संकेत दिया है कि बाज़ार स्थिरता बनाए रखने के लिए इन स्टॉक सीमाओं की समय-समय पर समीक्षा की जाएगी [cite: Source A, 18]|

मूल्य वृद्धि में योगदान देने वाले कारक

कच्चे जूट में हालिया मूल्य वृद्धि को कई कारकों के संगम का परिणाम माना जा रहा है। 2025-26 सीज़न में कम रकबा और उत्पादन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो पिछले वर्षों से उत्पन्न हुआ था जहाँ कीमतें अक्सर MSP ₹5,650 प्रति क्विंटल से नीचे गिर जाती थीं, जिससे किसानों को मक्का जैसी अधिक लाभदायक फसलों की ओर रुख करना पड़ा। इसके अतिरिक्त, जूट मिलों द्वारा खपत में वृद्धि, आयात प्रतिबंधों से वैश्विक आपूर्ति में आई कमी, और वित्तीय रूप से मजबूत मिलों द्वारा आक्रामक खरीद ने मांग दबाव को बढ़ा दिया है। 2025-26 के कच्चे जूट फसल की पर्याप्त मात्रा, जिसका अनुमान 25-30 लाख क्विंटल है, जो अभी भी अपकंट्री व्यापारियों और बिचौलियों के पास है, को लेकर भी चिंताएं हैं [cite: Source A, 27]|

बाज़ार की गतिशीलता और सरकारी सहायता उपाय

स्टॉक सीमाओं की घोषणा के बाद, कच्चे जूट की कीमतों में मामूली नरमी देखी गई है, जो हाल के उच्चतम स्तर से गिरकर लगभग ₹12,600 प्रति क्विंटल हो गई है [cite: Source A, 9]। हालांकि, बाज़ार सहभागियों का अनुमान है कि नई नीतियों के प्रवर्तन और पूर्ण प्रभाव पर स्पष्टता आने पर मूल्य अस्थिरता बनी रह सकती है। सरकार ने जूट उद्योग का समर्थन करने के लिए भी उपाय लागू किए हैं, जैसे कि बी-ट्विल जूट बैग की खरीद कीमतों में समय-समय पर वृद्धि करना, जो सितंबर 2024 में ₹58-60 प्रति बैग से बढ़कर जनवरी 2026 में ₹87.20 प्रति बैग हो गई हैं, ताकि मिलों को कच्चे माल की बढ़ी हुई लागत का प्रबंधन करने में मदद मिल सके। जूट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (JCI), MSP संचालन के लिए नोडल एजेंसी, ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दिखाया है, जिसमें FY 2024-25 में कर पश्चात लाभ ₹56.82 करोड़ तक बढ़ गया है।

ऐतिहासिक संदर्भ और उद्योग का दृष्टिकोण

यह हस्तक्षेप एक ऐसे दौर के बाद आया है जहाँ किसानों को अलाभकारी कीमतें मिल रही थीं, और MSP अक्सर पर्याप्त रिटर्न प्रदान करने में विफल रहता था। कच्चे जूट के लिए MSP वर्षों से लगातार बढ़ रहा है, जो 2014-15 में ₹2,400 प्रति क्विंटल से बढ़कर 2025-26 सीज़न के लिए ₹5,650 प्रति क्विंटल हो गया है, जिससे किसानों को उत्पादन की औसत लागत पर 66.8% का रिटर्न सुनिश्चित होता है। कपड़ा मंत्रालय ने कहा है कि इन उपायों का उद्देश्य आपूर्ति को स्थिर करना, बाज़ार में हेरफेर को रोकना और किसानों, निर्माताओं और उपभोक्ताओं सहित सभी हितधारकों के हितों का समर्थन करना है, इस चिंता के बीच कि मूल्य अस्थिरता उद्योग संचालन और रोजगार को बाधित कर सकती है [cite: Source A].

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