भारत सरकार ने चीन से आने वाले टाइटेनियम डाइऑक्साइड (Titanium Dioxide) पर **5 साल** के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा दी है। इसके तहत अब प्रति टन **$460 से $681** तक का शुल्क देना होगा।
ड्यूटी क्यों लगाई गई?
वित्त मंत्रालय की हालिया नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह कदम Directorate General of Trade Remedies की लंबी जांच के बाद उठाया गया है। जांच में पाया गया कि चीनी कंपनियां भारत में उत्पादन लागत से भी कम कीमतों पर यह पिगमेंट बेच रही थीं, जिससे स्थानीय निर्माताओं को भारी नुकसान हो रहा था। अब इस ड्यूटी के जरिए बाजार में बराबरी लाने की कोशिश की जा रही है।
पेंट और कोटिंग कंपनियों पर असर
टाइटेनियम डाइऑक्साइड पेंट, कोटिंग और प्लास्टिक इंडस्ट्री के लिए एक बेहद जरूरी रॉ मटेरियल है। Asian Paints, Berger Paints और Kansai Nerolac जैसी बड़ी पेंट कंपनियों के लिए यह पिगमेंट लागत का एक बड़ा हिस्सा होता है। अब यदि ये कंपनियां चीन से माल मंगाना जारी रखती हैं, तो उनकी खरीद लागत बढ़ जाएगी। निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर डालेंगी (प्राइस हाइक) या फिर अपने प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) में कटौती करेंगी।
घरेलू कंपनियों को मिलेगी राहत
यह फैसला केरल मिनरल्स एंड मेटल्स लिमिटेड (Kerala Minerals and Metals Ltd) और त्रावणकोर टाइटेनियम प्रोडक्ट्स (Travancore Titanium Products) जैसी घरेलू कंपनियों के लिए एक बड़ी राहत है। लंबे समय से ये कंपनियां सस्ते चीनी इंपोर्ट से प्रतिस्पर्धा करने में संघर्ष कर रही थीं। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से घरेलू उत्पादन क्षमता और निवेश में तेजी आएगी।
राहत की बात: किसे मिली छूट?
आम जनता और जरूरी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुछ छूट भी दी हैं। यह ड्यूटी फूड एडिटिव्स, फार्मास्युटिकल टैबलेट कोटिंग्स, कॉस्मेटिक्स और टेक्सटाइल में इस्तेमाल होने वाले नैनो-ग्रेड मटेरियल पर लागू नहीं होगी। इससे इन क्षेत्रों के उत्पादन पर तत्काल कोई असर नहीं पड़ेगा। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपनी सोर्सिंग रणनीति कैसे बदलती हैं और ग्लोबल सप्लाई चेन में क्या बदलाव आते हैं।
