सरकार का राजस्व बढ़ाने और घरेलू सप्लाई पर फोकस
सरकार ने देश में ईंधन की सप्लाई सुनिश्चित करने और अपना राजस्व बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी (Export Duty) में भारी बढ़ोतरी की गई है।
ड्यूटी में कितनी हुई बढ़ोतरी?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीजल पर यह ड्यूटी पहले के ₹21.50 प्रति लीटर से बढ़ाकर ₹55.50 प्रति लीटर कर दी गई है। वहीं, ATF पर ड्यूटी ₹29.50 प्रति लीटर से बढ़कर ₹42 प्रति लीटर हो गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब जियोपॉलिटिकल टेंशन के कारण ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ी हुई हैं, और ब्रेंट क्रूड करीब $96 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। Macquarie जैसे ब्रोकरेज हाउस का मानना है कि तेल की कीमतें $85-$90 के बीच रह सकती हैं, लेकिन सप्लाई में दिक्कतें बढ़ने पर यह $110 या $150 तक भी जा सकती हैं।
रिफाइनरी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव
इस ड्यूटी हाइक से भारतीय रिफाइनरियों, जैसे कि Reliance Industries, Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum Corporation (BPCL) और Hindustan Petroleum Corporation (HPCL) के एक्सपोर्ट से होने वाले मुनाफे पर सीधा असर पड़ेगा। पहले जहाँ ऊँची ग्लोबल कीमतों का फायदा उठाकर ये कंपनियां एक्सपोर्ट से अच्छा मुनाफा कमा रही थीं, वहीं अब बढ़ी हुई ड्यूटी के कारण उनके प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव आएगा। भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है, ऐसे में ग्लोबल कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर यहाँ साफ दिखता है।
आगे क्या?
सरकार हर दो हफ्ते में स्थिति की समीक्षा करेगी, ताकि बाजार के बदलते हालात के हिसाब से फैसले लिए जा सकें। Goldman Sachs ने Q4 के लिए $115 का अनुमान लगाया है, जबकि कंपनी की Q2 की भविष्यवाणी $90 थी। Crisil Ratings ने हाल ही में FY26 के लिए तेल मार्केटिंग कंपनियों के अच्छे प्रॉफिट ग्रोथ का अनुमान लगाया था, लेकिन यह नया टैक्स हाइक उनके एक्सपोर्ट बिजनेस के लिए एक नया फैक्टर है जिस पर बारीकी से नजर रखी जाएगी।