India Gold-Silver Prices: सोने-चांदी पर गिरी ब्याज दरों की गाज, डॉलर और RBI की चाल हावी

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Gold-Silver Prices: सोने-चांदी पर गिरी ब्याज दरों की गाज, डॉलर और RBI की चाल हावी
Overview

भारत में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है। ग्लोबल मार्केट में डॉलर की मजबूती और बढ़ती ब्याज दरों की चिंताओं ने इस गिरावट को हवा दी है, जबकि भू-राजनीतिक तनावों का असर फिलहाल कम दिख रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की नीतियों ने भी घरेलू बाजार में कीमतों को सीमित रखा।

ब्याज दरों की चिंता ने बुलियन को गिराया

ग्लोबल इकोनॉमिक प्रेशर और डोमेस्टिक पॉलिसी में बदलावों के चलते भारतीय बाजारों में सोना और चांदी की कीमतें नरम पड़ी हैं। मार्केट का फोकस अब सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की तलाश से हटकर मॉनेटरी पॉलिसी और करेंसी की चाल पर चला गया है।

₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास ट्रेड कर रहे गोल्ड फ्यूचर्स (Gold Futures) और ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम के भाव पर चल रहे सिल्वर फ्यूचर्स (Silver Futures) में यह ट्रेंड साफ दिखा। यह ग्लोबल ट्रेंड्स के अनुरूप था, जहां स्पॉट गोल्ड $4,467.30 प्रति औंस के करीब था। यूएस डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) भी 99.65 के स्तर पर बना हुआ था।

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $115.30 प्रति बैरल को पार कर गईं, लेकिन लगातार ऊंची ब्याज दरों का डर बुलियन पर भारी पड़ रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) ने मार्च 2026 में अपनी बेंचमार्क दर 3.5% से 3.75% के बीच रखी और इस साल केवल एक संभावित रेट कट का संकेत दिया। महंगाई दर 2.7% रहने की उम्मीद है, जो फेड के 2% के टारगेट से ऊपर है। ऐसे में, सोना जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स (Non-yielding assets) कम आकर्षक हो जाते हैं। मजबूत डॉलर भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए सोने को महंगा बना रहा है।

औद्योगिक मांग से चांदी को सहारा

जहां सोने की कीमतों पर व्यापक दबाव है, वहीं चांदी अपनी औद्योगिक मांग, खासकर चीन से, के कारण बेहतर प्रदर्शन कर रही है। 2026 की शुरुआत में, चीन का सिल्वर इम्पोर्ट (Silver Import) आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया। फरवरी अकेले में रिकॉर्ड 470 टन चांदी का आयात हुआ। औद्योगिक और निवेश क्षेत्रों से यह मजबूत मांग, सोने की तुलना में चांदी की कीमतों को सहारा दे रही है।

भू-राजनीतिक जोखिमों को मिली पछाड़

आम तौर पर, मिडिल ईस्ट में संघर्ष और तेल की बढ़ती कीमतें सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर बढ़ावा देती हैं। हालांकि, इस साल मैक्रोइकोनॉमिक फैक्टर (Macroeconomic factors) हावी रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) द्वारा रुपये को सहारा देने के उपायों ने भी स्थानीय सोने और चांदी की कीमतों पर लगाम लगाई है। यह पैटर्न से एक विचलन दिखाता है, जहां युद्ध अक्सर सोने की कीमतों को बढ़ाता है। वर्तमान में, बाजार का ध्यान मॉनेटरी पॉलिसी पर केंद्रित है।

आगे का आउटलुक: रेट्स और भू-राजनीति अहम

विश्लेषकों को उम्मीद है कि मध्यम अवधि में कीमती धातुओं के लिए माहौल बुलिश (Bullish) रहेगा, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव और सेंट्रल बैंक की खरीदारी जारी रहेगी। हालांकि, नियर-टर्म (Near-term) कीमतें टाइट मॉनेटरी पॉलिसी और मजबूत डॉलर के दबाव से तय होंगी। निवेशक अमेरिकी आर्थिक डेटा, जैसे पेरोल और महंगाई रिपोर्ट, और फेडरल रिजर्व की टिप्पणियों पर नजर रख रहे हैं। चीन की चांदी की लगातार मांग से स्थिरता की उम्मीद है, जबकि सोने की चाल ब्याज दर के आउटलुक और ग्लोबल सेंटीमेंट पर निर्भर करेगी।

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