1 अक्टूबर 2026 को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। 24-कैरेट सोना गिरकर लगभग **₹14,924** प्रति ग्राम पर आ गया है। इस गिरावट का सीधा असर रिटेल ज्वेलरी की मांग और गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों के कोलेटरल वैल्यू पर पड़ सकता है।
1 अक्टूबर 2026 को भारतीय बाजार में सोने की कीमतों में मामूली सुधार देखने को मिला। 24-कैरेट सोना गिरकर ₹14,924 प्रति ग्राम और 22-कैरेट सोना लगभग ₹13,680 प्रति ग्राम के आसपास रहा। यह गिरावट हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली (profit-booking) और बाजार में सुस्त मांग का नतीजा है।
ज्वेलरी रिटेलर्स पर असर
सोने के भाव में उतार-चढ़ाव का सीधा असर Titan, Kalyan Jewellers और Malabar Gold & Diamonds जैसी बड़ी ज्वेलरी कंपनियों पर पड़ता है। जब कीमतें अस्थिर होती हैं, तो ग्राहक खरीदारी टालने लगते हैं, जिससे ट्रांजेक्शन वॉल्यूम धीमा हो सकता है। साथ ही, कंपनियों की इन्वेंट्री वैल्यू और प्रॉफिट मार्जिन पर भी दबाव बढ़ सकता है क्योंकि बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना हमेशा आसान नहीं होता।
गोल्ड लोन कंपनियों का रिस्क
Muthoot Finance और Manappuram Finance जैसी NBFCs के लिए सोने की कीमतों में गिरावट एक चुनौती है। ये कंपनियां सोने को गिरवी रखकर कर्ज देती हैं। यदि सोने के भाव में लंबी गिरावट आती है, तो लोन-टू-वैल्यू (LTV) रेशियो प्रभावित होता है, जिससे कंपनी के लोन पोर्टफोलियो का रिस्क प्रोफाइल बढ़ सकता है। हालांकि मौजूदा मामूली गिरावट को संभालना आसान है, लेकिन बड़ी गिरावट कंपनियों के कोलेटरल सिक्योरिटी को खतरे में डाल सकती है।
मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स
भारत में सोने की कीमतें ग्लोबल मार्केट से तय होती हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और US Federal Reserve के ब्याज दरों पर संकेत सीधे तौर पर बुलियन मार्केट को प्रभावित कर रहे हैं। आने वाले समय में निवेशकों को ग्लोबल स्पॉट मार्केट की हलचल पर नजर रखनी चाहिए क्योंकि वही भारतीय बाजार की अगली दिशा तय करेगा।
