India Gold Prices: मिडिल ईस्ट के डर से सोने में तूफानी तेजी, पर डॉलर की मजबूती से लगा ब्रेक

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Gold Prices: मिडिल ईस्ट के डर से सोने में तूफानी तेजी, पर डॉलर की मजबूती से लगा ब्रेक
Overview

27 मार्च 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में ज़बरदस्त उछाल देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव **10 ग्राम** के लिए बढ़कर **₹142,500** तक पहुंच गया, जो **1.56%** की बढ़त है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी इस उछाल के मुख्य कारण रहे।

मिडिल ईस्ट का तनाव और तेल का खेल

Middle East में जारी तनाव ने एक बार फिर सोने को 'सुरक्षित निवेश' (Safe Haven) के तौर पर चमकने का मौका दिया है। इस बीच, Brent क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर $107.01 प्रति बैरल तक पहुंच गईं। ये दोनों ही फैक्टर्स सोने की मांग को बढ़ाते हैं, क्योंकि निवेशक अनिश्चितता के माहौल में अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखना चाहते हैं और महंगाई से बचाव का रास्ता तलाशते हैं।

डॉलर और ब्याज दरें: सोने के लिए चुनौती

हालांकि, सोने की ये तेजी कुछ आर्थिक वजहों से प्रभावित हो सकती है। पिछले एक महीने में US Dollar Index (DXY) में 1.49% का इजाफा हुआ है, जो अब 99.8487 पर है। मजबूत डॉलर आमतौर पर विदेशी खरीदारों के लिए सोना महंगा बना देता है। ऐसे में, सोने जैसी नॉन-यील्ड एसेट (Non-Yielding Asset) को होल्ड करने की लागत बढ़ जाती है।
इसके अलावा, US Federal Reserve, European Central Bank (ECB) और Bank of England जैसे प्रमुख सेंट्रल बैंक्स महंगाई की चिंताओं, खासकर एनर्जी की ऊंची कीमतों के कारण, ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने के संकेत दे रहे हैं। यह पहले की उन उम्मीदों के विपरीत है, जिनमें रेट कट (Rate Cut) की आशा की जा रही थी।

वैश्विक बाजार और भारतीय प्रीमियम

वैश्विक स्तर पर, सोना करीब $4,395 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है। अपने जनवरी 2026 के ऑल-टाइम हाई $5,589 से यह लगभग 21% गिर चुका है। JPMorgan और Goldman Sachs जैसी संस्थाएं 2026 के अंत तक सोने के $5,055 से $5,400 तक पहुंचने का अनुमान लगा रही हैं।
वहीं, चांदी में 2.52% की बढ़त के साथ $69.78 प्रति औंस पर कारोबार हुआ। भारतीय सर्राफा बाजार की बात करें तो, डॉलर एडजस्टमेंट के बाद भी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क से थोड़ी कम हैं, जिसका मुख्य कारण भारत के इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) और स्थानीय टैक्स (Local Taxes) हैं।
Interesting Fact: भारत में Gold Exchange-Traded Funds (ETFs) ने साल 2026 की फरवरी तक 76-78% तक के शानदार रिटर्न और इनफ्लो (Inflow) देखे हैं। यह भारतीय खुदरा निवेशकों की गहरी रुचि को दर्शाता है, खासकर तब जब भारतीय शेयर बाज़ारों ने वैश्विक बाज़ारों से पिछड़ना शुरू किया है। यह डोमेस्टिक डिमांड स्थानीय सोने की कीमतों को सपोर्ट करती है।

आगे क्या? जोखिम और संभावनाएं

फिलहाल, सोने की कीमतों में आ रही तेजी के कुछ बड़े जोखिम भी हैं। US डॉलर का लगातार मजबूत होना और सेंट्रल बैंक्स का लंबी अवधि तक ऊंची ब्याज दरें बनाए रखने का संकेत, सोने की पारंपरिक प्राइस मूवमेंट के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं। मिडिल ईस्ट का तनाव भले ही सेफ-हेवन डिमांड बढ़ाए, लेकिन यह बाज़ार में अस्थिरता भी लाता है। अगर कूटनीतिक समाधान निकलता है या सप्लाई की समस्या कम होती है, तो सोने को मिलने वाला जियोपॉलिटिकल प्रीमियम (Geopolitical Premium) तेज़ी से खत्म हो सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि 2026 में सोने की कीमतें $4,700 से $6,000 प्रति औंस तक जा सकती हैं। सेंट्रल बैंक की खरीदारी और निवेशकों की विविध मांग इसे सपोर्ट करेगी। हालांकि, मौजूदा आर्थिक दबावें तत्काल मूल्य वृद्धि को सीमित कर सकती हैं, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के बीच एक स्टोर ऑफ वैल्यू (Store of Value) के रूप में सोने का लॉन्ग-टर्म आउटलुक सकारात्मक बना हुआ है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.