भारत में सोने की सप्लाई पर संकट, इम्पोर्ट में हो रही देरी
भारत में सोने के प्रीमियम (Gold Premium) पिछले ढाई महीनों से भी ज्यादा समय में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए हैं, जो $15 प्रति औंस को पार कर गए हैं। यह भारी बढ़ोतरी कोई जबरदस्त डिमांड की वजह से नहीं, बल्कि इम्पोर्ट (Import) में आ रही बड़ी रुकावटों और टैक्स (Tax) को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण हुई है। सरकारी मंजूरी के ऑर्डर में देरी के बाद, भारतीय बैंकों को कस्टम्स (Customs) में सोने की बड़ी खेपों को अटकाना पड़ा। हालांकि, 1 अप्रैल, 2026 से नए इम्पोर्ट अथॉराइजेशन (Import Authorization) लागू हो गए हैं, लेकिन लागू होने वाले टैक्स को लेकर अस्पष्टता (Ambiguity) अभी भी इम्पोर्ट को धीमा कर रही है। इस सप्लाई की रुकावट के कारण ही डीलरों ने कीमतें बढ़ाई हैं, जो पिछले हफ्ते देखी गई छूट (Discount) के बिल्कुल उलट है।
कस्टम्स (Customs) में अटकीं खेपें और टैक्स (Tax) की उलझन
इस महीने, भारतीय बैंकों को सोने और चांदी के शिपमेंट (Shipment) रोकने पड़े क्योंकि सरकारी मंजूरी का ऑर्डर देर से आया। इसके चलते पांच मीट्रिक टन से ज्यादा सोना और करीब आठ टन चांदी कस्टम्स (Customs) सुविधाओं में फंस गई। हालांकि, 17 अप्रैल, 2026 को मंजूरी मिल गई, जिससे 15 बैंकों को मार्च 2029 तक कीमती धातुएं इम्पोर्ट करने की इजाजत मिल गई, पर टैक्स दरों को लेकर सवाल अभी भी इम्पोर्ट को पूरी तरह से शुरू करने में बाधा बन रहे हैं। ये रेगुलेटरी (Regulatory) दिक्कतें ऐतिहासिक रूप से भारतीय सोने की कीमतों और ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को प्रभावित करती रही हैं। 2 अप्रैल, 2026 से सोने और चांदी के गहनों के इम्पोर्ट पर अतिरिक्त प्रतिबंध (Curbs) भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के दुरुपयोग को रोकने के लिए लगाए गए हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है।
चीन में फिजिकल डिमांड (Physical Demand) में नई जान
वहीं, दुनिया के एक और बड़े गोल्ड कंज्यूमर (Gold Consumer) चीन में फिजिकल डिमांड (Physical Demand) में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी जा रही है। शंघाई (Shanghai) में सोना अब ग्लोबल बेंचमार्क (Global Benchmark) से $9 से $12 प्रति औंस प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, जो पिछले हफ्ते के $3 से $6 के प्रीमियम से काफी ज्यादा है। यह मौजूदा कीमतों पर खरीदारी में मजबूत दिलचस्पी को दर्शाता है। चीन की यह मजबूत फिजिकल डिमांड (Physical Demand) भारत में अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) के बाद खुदरा खरीदारी (Retail Buying) के नरम पड़ने के विपरीत है, जहाँ 10 ग्राम सोने के लिए ₹1,50,000 से नीचे की कीमतों पर डिमांड अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
ग्लोबल दबाव (Global Pressures) और विश्लेषकों (Analysts) की बदलती राय
वैश्विक स्तर (Globally) पर, स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) की कीमतें इस हफ्ते गिरावट के लिए तैयार दिख रही हैं, जिससे लगातार चार हफ्तों की तेजी पर ब्रेक लग जाएगा। मध्य पूर्व (Middle East) के तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में रुकावटों के कारण बढ़े तेल की कीमतों ने महंगाई (Inflation) की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 24 अप्रैल, 2026 को इंटरनेशनल स्पॉट गोल्ड (International Spot Gold) की कीमतें लगभग $4,671.85 प्रति ट्रॉय औंस थीं। इस माहौल के बीच विश्लेषकों (Analysts) ने अपने अनुमानों को संशोधित किया है। Morgan Stanley ने 2026 की दूसरी छमाही के लिए गोल्ड प्राइस टारगेट (Gold Price Target) को $5,700 से घटाकर $5,200 प्रति औंस कर दिया है, जिसका कारण सप्लाई शॉक (Supply Shocks) और बढ़ती रियल इंटरेस्ट रेट्स (Real Interest Rates) को बताया गया है। एनालिस्ट (Analysts) अब सोने को केवल सेफ-हेवन (Safe-haven) एसेट के तौर पर नहीं, बल्कि लिक्विडिटी (Liquidity) और मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) के इंडिकेटर (Indicator) के तौर पर भी देख रहे हैं। हालांकि, 2026 के अंत के लिए अनुमान अभी भी आशावादी (Optimistic) हैं, जो $5,400 (Goldman Sachs) से लेकर $6,300 (J.P. Morgan और Wells Fargo) तक की रेंज में हैं। अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की मजबूती भी फिलहाल सोने की कीमतों पर दबाव डाल रही है।
बाजार का आउटलुक (Market Outlook) और जोखिम (Risk Factors)
विश्लेषकों (Analysts) को उम्मीद है कि निकट अवधि (Near Term) में सोने की कीमतें एक रेंज में ट्रेड करेंगी, संभवतः थोड़ी नीचे की ओर जा सकती हैं जब तक कि सेंट्रल बैंक (Central Bank) की ब्याज दर (Interest Rate) की दिशा के संकेत और स्पष्ट न हो जाएं। $4,700 के आसपास महत्वपूर्ण सपोर्ट (Support) दिख रहा है, जबकि $4,895 के करीब रेजिस्टेंस (Resistance) है। 2026 के अंत की ओर, अधिक आशावादी अनुमान $5,400 से $6,300 प्रति औंस के बीच कीमतों की भविष्यवाणी करते हैं, जिसे सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी और करेंसी (Currency) के अवमूल्यन (Debasement) की चिंताओं का समर्थन प्राप्त है। तत्काल मूल्य कार्रवाई (Price Action) संभवतः मध्य पूर्व (Middle East) के घटनाक्रमों, तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की नीतिगत संकेतों पर निर्भर करेगी। सोना इन वैश्विक वित्तीय (Financial) और भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारकों से बहुत प्रभावित होता है, जिससे यह भावनाओं में तेजी से बदलाव के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
