India Gold Price: डॉलर की मार और टेंशन के बीच भारत में सोना क्यों है महंगा? जानिए वजह

COMMODITIES
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
India Gold Price: डॉलर की मार और टेंशन के बीच भारत में सोना क्यों है महंगा? जानिए वजह
Overview

भारत में सोने की कीमतों में भले ही थोड़ी गिरावट आई हो, लेकिन दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तुलना में भारतीय सोना अभी भी प्रीमियम पर बना हुआ है। यह प्रीमियम भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच निवेशकों के लिए एक जटिल ट्रेडिंग माहौल बना रहा है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

सोने के भाव में नरमी, प्रीमियम बरकरार

भारतीय सर्राफा बाजार में 7 अप्रैल 2026 को 24-कैरेट सोने का भाव ₹730 गिरकर ₹149,240 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह 0.49% की गिरावट थी। इसी समय, अंतरराष्ट्रीय स्पॉट गोल्ड लगभग $2350 प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इसके बावजूद, भारतीय सोना अंतरराष्ट्रीय दरों से काफी ऊपर बना हुआ है। भारत में 24-कैरेट सोने की कीमत लगभग ₹149,240 प्रति 10 ग्राम है, जबकि दुबई में यह लगभग ₹140,560 है। यानी, भारतीय सोना 6.18% तक महंगा है, यह अंतर स्थानीय करों से पहले की बात है। यह प्रीमियम घरेलू मांग और बाजार के उन कारकों को दर्शाता है जो भारतीय कीमतों को बढ़ा रहे हैं।

वैश्विक ताकतों का टकराव: भू-राजनीति बनाम मजबूत डॉलर और आक्रामक फेड

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, मध्य पूर्व में बढ़ी भू-राजनीतिक अशांति सोने को एक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर बढ़ावा देती है। हालांकि, इस बार इसका असर एक मजबूत अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (US Dollar Index) के कारण दब रहा है, जो 104.5 के करीब कारोबार कर रहा है। मजबूत डॉलर अन्य मुद्राओं का उपयोग करने वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा बना देता है। इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) का रुख भी बदल रहा है। निवेशक अब 2026 में शून्य से लेकर केवल एक रेट कट की उम्मीद कर रहे हैं, जो पहले के अनुमानों से काफी अलग है। इंफ्लेशन (Inflation) से लड़ने पर फेड का यह जोर, ब्याज देने वाली संपत्तियों को सोने की तुलना में अधिक आकर्षक बना रहा है।

घरेलू कारक और बाजार की चाल

भारतीय रुपये का डॉलर के मुकाबले मूल्य और लगभग 10-12.5% की महत्वपूर्ण आयात शुल्क (Import Duties) जैसी चीजें अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ कीमत के अंतर को बढ़ा सकती हैं। हालांकि, खुदरा निवेशकों (Retail Investors) से लगातार बनी रहने वाली मांग, जो अक्सर सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शादी के मौसम से बढ़ती है, कीमतों को एक ठोस आधार प्रदान करती है। भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Gold ETFs) ने घरेलू स्पॉट कीमतों का अनुसरण किया है, जिससे 2026 में मामूली रिटर्न देखने को मिला है।

सोने की कीमतों के लिए जोखिम

हालांकि, सोने की कीमतों के लिए जोखिम बने हुए हैं। मजबूत डॉलर एक महत्वपूर्ण बाधा के रूप में काम कर रहा है, जो भू-राजनीतिक चिंताओं से मिलने वाले लाभ को बेअसर कर सकता है। फेडरल रिजर्व का इंफ्लेशन पर ध्यान केंद्रित करना भी बॉन्ड जैसी संपत्तियों को गैर-उपज वाले सोने से अधिक आकर्षक बनाता है। यदि इंफ्लेशन में कमी आती है या भू-राजनीतिक तनाव कम होते हैं, तो सोने की सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग कम हो सकती है। भारत में वैश्विक बाजारों की तुलना में सोने की घरेलू कीमतें अधिक होने के कारण, अगर कीमतें और बढ़ती हैं, तो यह विशेष रूप से तब अधिक संवेदनशील होगा जब बॉन्ड प्रतिस्पर्धी रिटर्न दे रहे हों।

बाजार का अनुमान

आगे देखते हुए, विश्लेषकों को उम्मीद है कि सोने की कीमतें एक दायरे में कारोबार करेंगी। इंडसइंड सिक्योरिटीज (Indusind Securities) के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी (Jigar Trivedi) का मानना है कि एमसीएक्स गोल्ड जून वायदा (MCX Gold June futures) ₹149,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास सपोर्ट पा सकता है और ट्रेडिंग सत्र के दौरान बढ़ सकता है। यह अनुमान भू-राजनीतिक घटनाओं और केंद्रीय बैंक की नीति संकेतों द्वारा संचालित निरंतर अस्थिरता का सुझाव देता है।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.